सशस्त्र बलों को बहुक्षेत्रीय युद्ध के लिए तैयार रहना होगा: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय विजय दुर्ग (पूर्व में फोर्ट विलियम) में 16वें संयुक्त कमांडर सम्मेलन का शुभारंभ किया.

संवाददाता, कोलकाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय विजय दुर्ग (पूर्व में फोर्ट विलियम) में 16वें संयुक्त कमांडर सम्मेलन का शुभारंभ किया. तीन दिवसीय इस सम्मेलन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी एक मंच पर आये हैं. सम्मेलन में देश की मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की रणनीतियों और सेनाओं के आधुनिकीकरण पर गहन विमर्श किया जा रहा है.

सुधार और परिवर्तन पर फोकस: इस बार सम्मेलन का विषय रखा गया है : ‘सुधारों का वर्ष- भविष्य के लिए परिवर्तन’. प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र में कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की सेनाओं को नयी तकनीक और आधुनिक उपकरणों से लैस करना समय की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में युद्ध के स्वरूप बदलेंगे और सेनाओं को बहु-क्षेत्रीय युद्ध के लिए तैयार रहना होगा.

इसी मौके पर प्रधानमंत्री ने भारतीय सशस्त्र बल विजन 2047 दस्तावेज का विमोचन किया. इस दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि भारत की सेनाएं आने वाले 25 वर्षों में किन-किन क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ायेगी. इसमें हथियारों के आधुनिकीकरण, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और संयुक्त अभियानों पर विशेष बल दिया गया है.

संयुक्त कमांडर सम्मेलन का क्या है महत्व

संयुक्त कमांडर सम्मेलन को देश की सुरक्षा नीतियों का सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जाता है. यह केवल एक बैठक नहीं बल्कि भारतीय सेनाओं की दिशा तय करने वाला रोडमैप है. प्रधानमंत्री की उपस्थिति से इसकी अहमियत और बढ़ जाती है क्योंकि इससे सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन में लिये गये फैसले भारत की रक्षा तैयारियों पर दूरगामी असर डालेंगे. खासकर विजन 2047 दस्तावेज सेनाओं के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति तय करेगा.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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