नाराज भाजपा सांसद ने की अलग कूचबिहार राज्य की मांग

उनका दावा किया कि वह ऐतिहासिक समझौते के आधार पर भारतीय नागरिक हैं और उसी समझौते के तहत कूचबिहार भारत में शामिल हुआ था.

कहा- ऐतिहासिक कूचबिहार समझौते का पालन नहीं हुआ तो अलग कर दो

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री लगातार विरोध जता रही हैं, वहीं अब भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत राय ने भी इस प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की है. अनंत राय ने एसआइआर के खिलाफ आवाज उठाते हुए अलग कूचबिहार राज्य की मांग कर दी है.

उनका दावा किया कि वह ऐतिहासिक समझौते के आधार पर भारतीय नागरिक हैं और उसी समझौते के तहत कूचबिहार भारत में शामिल हुआ था. उन्होंने कहा कि उस समझौते का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए. सांसद ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कूचबिहार समझौते को लागू नहीं किया गया, तो उन्हें अलग कर दिया जाये.

उन्होंने कहा, “कूचबिहार समझौते के जरिए भारत में शामिल हुआ था. उस समझौते का पालन होना चाहिए, नहीं तो हमें अलग कर दो.” भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हर पांच साल में बदल जाते हैं, लेकिन देश वही रहता है. सरकार बदलने से राज्य के प्रति जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती.

अनंत ने चुनाव आयोग द्वारा हाल में अपनायी गयी नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया पर भी कड़ी आपत्ति जतायी. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों से पहचान या नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं मांगे जा रहे, जबकि कूचबिहार के आम नागरिकों से बार-बार कागजात प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है. उनके अनुसार, यह दोहरा मापदंड संवैधानिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है. उन्होंने कहा, “जब आदिवासियों से पेपर नहीं मांगे जाते, तो हमसे क्यों मांगे जा रहे हैं? चुनाव आयोग जो प्रक्रिया अपना रहा है, वह पूरी तरह गलत है.”

भाजपा विधायक ने दावा किया कि इस तरह की सत्यापन प्रक्रिया से कूचबिहार के लोगों में घबराहट और अनिश्चितता का माहौल बन रहा है. चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग इस तरह की कार्रवाई कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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