पश्चिम बंगाल के दौरे पर आये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (19 जुलाई) को कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय (National Library) परिसर में ‘शब्द संग्रहालय’ का उद्घाटन किया. यह भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को समर्पित अपनी तरह का पहला ऐसा संग्रहालय है, जो आगंतुकों को एक जीवंत और सहभागी सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा.
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की खास पहल
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पुस्तकालय द्वारा तैयार किया गया यह डिजिटल संग्रहालय केवल पुस्तकों के पारंपरिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है. आगंतुकों को बिल्कुल नया और सहभागी (Interactive) अनुभव देने के लिए इसमें आधुनिक डिजिटल डिस्प्ले, होलोग्राम और मोशन-सेंसर (Motion-Sensor) जैसी तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है. इनके जरिये देश की मौखिक और लिखित भाषाई परंपराओं के सदियों पुराने इतिहास और उनके विकास की यात्रा को जीवंत रूप में दर्शाया गया है.
'शब्दलोक': 22 भाषाओं को समर्पित 9 भव्य गैलरी
इस शब्द संग्रहालय को ‘शब्दलोक’ नाम से विकसित किया गया है. इसके पहले चरण में भारत की भाषाई विविधता, विभिन्न लिपियों और समृद्ध साहित्यिक विरासत की यात्रा को सहेजा गया है. यह संग्रहालय भाषा को एक केवल इतिहास न मानकर एक जीवंत इकाई के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसने समय-समय पर हमारे समाज को आकार दिया है और समाज के साथ खुद भी विकसित हुई है.
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संग्रहालय की मुख्य विशेषताएं
- 9 दीर्घाएं (9 Galleries): पूरे संग्रहालय में 9 अलग-अलग दीर्घाएं हैं, जिनमें भाषाओं के इतिहास के विभिन्न पहलुओं और भारत की सभ्यता व संस्कृति पर उनके प्रभाव को बेहद खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है.
- संविधान की 22 भाषाएं : ‘शब्दलोक’ विशेष रूप से भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं को समर्पित है.
- मौखिक से इलेक्ट्रॉनिक तक का सफर : इसमें आदिम मौखिक परंपराओं से लेकर प्राचीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक मुद्रित पुस्तकों और आज के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल पाठ (Electronic Text) तक भाषाओं के क्रमिक विकास को दिखाया गया है.
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यह अनूठा संग्रहालय न केवल भाषा विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए, बल्कि आम नागरिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी भारत की सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने का एक बेहतरीन जरिया साबित होगा.
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