प्रकृति को नष्ट कर रहा है एआइ, बचाव के लिए ग्रीन एआइ जरूरी

उन्होंने चेताया क एआइ पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है. यदि शुरुआत से ही ग्रीन एआइ पर जोर नहीं देंगे, तो हमें भयानक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा.

बोले प्रसेनजीत मजूमदार कोलकाता. ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और पिघलते ग्लेशियरों के पीछे भी एआइ एक कारण है, जो प्रकृति को नष्ट कर रहा है. बचाव के लिए ग्रीन एआइ पर जोर देना बेहद जरूरी है. यह कहना है ग्रीन एआइ स्टार्टअप के संस्थापक-निदेशक एवं धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रसेनजीत मजूमदार का. सोमवार को मिंटो पार्क स्थित नये कार्यालय से पर्यावरण जागरूकता अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पलभर में हजारों कर्मचारियों का काम कर रहा है, जिससे आइटी क्षेत्र में छंटनी भी बढ़ रही है. उन्होंने चेताया क एआइ पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है. यदि शुरुआत से ही ग्रीन एआइ पर जोर नहीं देंगे, तो हमें भयानक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा. मजूमदार ने बताया कि विदेशों में कुछ प्रौद्योगिकीविदों ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन एआइ का प्रयोग शुरू किया है. भारत में अभी इसकी गति धीमी है, लेकिन उनकी टीम ने एडु टेक, लीगल टेक, वॉइस और बाइलिंगुअल चैटबॉट्स जैसे कई उपकरण तैयार किये हैं, जो पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हैं. खास बात यह कि इनमें बंगाली भाषा को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित किया गया है, ताकि लोग मोबाइल या व्हाट्सऐप पर सहजता से बंगाली में लिखकर या बोलकर इनका उपयोग कर सकें और वह भी किफायती दरों पर. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट और ओपनएआइ जैसी कंपनियों ने अपनी उच्च ताप वाली जीपीयू मशीनें अपने देश की बजाय फिनलैंड जैसे ठंडे देशों में स्थापित की हैं, ताकि ऊर्जा खर्च कम हो. मौके पर उपस्थित कंपनी के प्रबंध निदेशक सुब्रत मित्रा ने कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से कोलकाता में ग्रीन एआइ पर काम कर रहे हैं और अब यह एक क्रांति का रूप ले चुका है. उनका सपना है कि बंगाल से जन्मी यह स्टार्टअप कंपनी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाये. उन्होंने कहा कि आज अधिकांश एआइ उपकरण विदेशी हैं और इनमें क्षेत्रीय भाषाओं की पर्याप्त क्षमता नहीं है. हम भारतीय एआइ उपकरणों को आगे लाने पर जोर दे रहे हैं. कार्यक्रम में प्रख्यात वकील बर्जिस देसाई, आइएसआइ कोलकाता के प्रोफेसर मंदार मित्र, कॉर्पोरेट अधिकारी कौस्तव दत्ता समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए.

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Author: GANESH MAHTO

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