हाइकोर्ट ने पर्षद को चार हफ्ते में हलफनामा देने को कहा, टीइटी संबंधी शिकायतों को बताया गंभीर, एसएमएस से नतीजे पर सवाल

कोलकाता: पैनल न बना कर प्राथमिक में सफल उम्मीदवारों को क्यों एसएमएस या इमेल के जरिये नौकरी मिलने की बात बतायी गयी. कलकत्ता हाइकोर्ट में प्राथमिक नियुक्ति से संबंधित एक मामले में अदालत ने यह जानना चाहा. हाइकोर्ट ने इस संबंध में पर्षद से चार हफ्ते के भीतर हलफनामा तलब किया है. न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय […]

कोलकाता: पैनल न बना कर प्राथमिक में सफल उम्मीदवारों को क्यों एसएमएस या इमेल के जरिये नौकरी मिलने की बात बतायी गयी. कलकत्ता हाइकोर्ट में प्राथमिक नियुक्ति से संबंधित एक मामले में अदालत ने यह जानना चाहा. हाइकोर्ट ने इस संबंध में पर्षद से चार हफ्ते के भीतर हलफनामा तलब किया है. न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय ने यह निर्देश दिया है. प्राथमिक टीइटी के करीब 150 प्रशिक्षित उम्मीदवारों ने कलकत्ता हाइकोर्ट में इस संबंध में मामला दायर किया है.
मामले में क्या है राज्य सरकार का नजरिया : कोर्ट
याचिका में कहा गया है कि जिस तरह से पैनल न गठित करके प्राथमिक में नियुक्ति की जा रही है उससे प्रतीत होता है कि नियुक्ति में अनियमितता बरती जा रही है. प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने का आरोप लगाया गया है.
अदालत ने इस पर पूछा कि इस संबंध में राज्य सरकार का क्या नजरिया है? पर्षद और जिला प्राथमिक पर्षद का क्या नजरिया है? आवेदनकारियों के वकील विकास भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि एनसीटीइ (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन) के कानून में बताया गया है कि प्राथमिक शिक्षा पर्षद को इंटरव्यू में उत्तीर्ण सभी उम्मीदवारों की सूची घोषित करनी होगी. लेकिन इस मामले में पर्षद ने इस नियम का पालन नहीं किया. श्री भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि नियुक्ति के पीछे रुपये का खेल हो रहा है. इसके अलावा उनका यह भी आरोप है कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों को छोड़कर गैर प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के लिए ही यह प्रक्रिया अपनायी गयी है. इसलिए इस नियुक्ति को रद्द किया जाये. अदालत ने इसपर कहा कि प्राथमिक शिक्षा पर्षद को ऐसे गंभीर आरोपों का जवाब देना चाहिए. इसपर पर्षद की ओर से बताया गया कि इसके लिए उन्हें कुछ समय दिया जाये.

अदालत ने पर्षद को निर्देश दिया कि चार हफ्ते के भीतर हलफनामा देकर बताना होगा कि क्यों, पैनल गठित न करके, एसएमएस व इमेल के जरिये सफल उम्मीदवारों को जानकारी दी जा रही है. साथ ही जो गंभीर आरोप उनके खिलाफ लगाये गये हैं वह भी हलफनामे के जरिये स्पष्ट करना होगा. इसके अलावा नियमानुसार नियुक्ति के पहले राज्य भर के शून्य पदों की तादाद भी पर्षद को बतानी होती है. लेकिन ऐसा न करके पर्षद की ओर से आखिर क्यों जिला आधारित नियुक्ति की जा रही है. हलफनामे में इसे भी स्पष्ट करना होगा. हलफनामा जमा देने के छह सप्ताह के भीतर मामला करने वालों को पर्षद का जवाबी हलफनामा जमा देने का निर्देश अदालत ने दिया है.

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