नारद न्यूज के खिलाफ कोर्ट जायेगी तृणमूल

कोलकाता. आसन्न विधानसभा चुनाव के ठीक पहले नारद न्यूज द्वारा राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन मंत्रियों, कुछ सांसदों और विधायकों ने कथित तौर पर एक फरजी आयात-निर्यात कंपनी से घूस लेने की घटना का परदाफाश होने के बाद यहां राजनीतिक गरमा गयी है. स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में पूछे जाने पर सांसद व पार्टी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 15, 2016 7:27 AM
कोलकाता. आसन्न विधानसभा चुनाव के ठीक पहले नारद न्यूज द्वारा राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन मंत्रियों, कुछ सांसदों और विधायकों ने कथित तौर पर एक फरजी आयात-निर्यात कंपनी से घूस लेने की घटना का परदाफाश होने के बाद यहां राजनीतिक गरमा गयी है. स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में पूछे जाने पर सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल राय ने इस वीडियो टेप को ‘छेड़छाड़ किया गया’ करार देते हुए आरोपों को खारिज कर दिया.

उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन करनेवाली नारद न्यूज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने बात कही. सोमवार की शाम तृणमूल भवन में संवाददाता सम्मेलन में श्री राय ने कहा कि यह विरोधी पार्टियों की साजिश का नतीजा है. यह स्टिंग ऑपरेशन तृणमूल को बदनाम करने के लिए किया गया है क्योंकि जो पार्टी से राजनीतिक तौर पर सीधे लड़ नहीं सकते, वे अप्रत्यक्ष रूप से उसे नीचा दिखाने में लगे हुए हैं.

गौरतलब है कि समाचार पोर्टल नारद न्यूज ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से मात्र एक महीने पहले इस स्टिंग ऑपरेशन का टेप जारी किया और दावा किया कि वे इस पर पिछले दो वर्षों से कार्य कर रहे थे. टेप में कथित तौर पर मंत्रियों और विधायकों को एक नकली कंपनी ‘इंपेक्स कंसल्टेंसी’ के लिए लॉबिंग करने जैसा पक्ष लेने के बदले नकदी स्वीकार करते हुए दिखाया गया है और उस नकदी के बारे में कहा जा रहा है कि वह राशि करीब पांच लाख रुपये थी. पोर्टल के एक पत्रकार ने उन लोगों से मदद लेने के लिए स्वयं को कंपनी के एक प्रतिनिधि के तौर पर पेश किया था और इस स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था.
वहीं, इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि पार्टी को बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गयी है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि राज्य की जनता को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पूरा भरोसा है और यह विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद प्रमाणित हो जायेगा. विरोधी पार्टियों को अगर तृणमूल कांग्रेस से लड़ना है तो वह राजनीतिक लड़ाई लड़े, लेकिन इस प्रकार से पार्टी का दुष्प्रचार विरोधी पार्टियों के लिए महंगा साबित होगा.