श्री राम सेवा समिति ट्रस्ट के 31वें वार्षिकोत्सव पर ‘नानी बाई का मायरा’ शुरू

हावड़ा : ‘भरोसा ही भजन है. आप लाख माला जपो, लेकिन भरोसा न हो तो कोई लाभ नहीं. भरोसे के धरातल पर ही पर ही आपका भजन फलता है.’ ये उद्गार संत श्री शम्भु शरण जी लाटा ने श्री राम सेवा समिति ट्रस्ट के 31वें वार्षिकोत्सव पर सलकिया के 191, जीटी रोड (नाॅर्थ) में स्थित […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 28, 2020 2:46 AM

हावड़ा : ‘भरोसा ही भजन है. आप लाख माला जपो, लेकिन भरोसा न हो तो कोई लाभ नहीं. भरोसे के धरातल पर ही पर ही आपका भजन फलता है.’ ये उद्गार संत श्री शम्भु शरण जी लाटा ने श्री राम सेवा समिति ट्रस्ट के 31वें वार्षिकोत्सव पर सलकिया के 191, जीटी रोड (नाॅर्थ) में स्थित कृष्ण भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘नानी बाई का मायरा’ सुनाते हुए कही.

उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसा देखने-सुनने को मिलता है कि लोग भजन-कीर्तन, दान आदि करते तो हैं, लेकिन उनके मन में इसके परिणाम को लेकर संशय बना रहता है. श्रद्धेय लाटा जी ने कहा कि जब भरोसा ही नहीं है, तो फिर ऐसा करने की क्या जरूरत है.
भजन कभी व्यर्थ नहीं जाता, लेकिन इसका आधार पक्का भरोसा होना चाहिए और भक्त नरसी की कथा हमें यही समझाती है कि अगर अपने आराध्य में अटूट विश्‍वास हो तो फिर कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि हम वर्षों से भगवत भजन कर रहे हैं और इसका लाभ लोगों को मिल रहा है.
पं. लाटा ने कहा कि सेवा में तन सर्वोपरि है, लेकिन वर्तमान समय में सेवा में धन को प्राथमिकता मिल रही है. यह सही है कि धन जरूरी है सेवा के लिए, लेकिन इस का स्थान तीसरा है.
इसलिए कहा भी गया है कि तन-मन-धन अर्थात सेवा में पहला स्थान तन का दूसरा मन का और अंत में धन का है. कथा प्रसंगवश उन्होंने कहा कि इच्छित फल की प्राप्ति भगवान शंकर की आराधना के बिना नहीं हो सकती.
इस संदर्भ में उन्होंने रामचरित मानस की एक चौपाई को उद्धृत करते हुए कहा कि भाग्य को बदलने की ताकत भगवान शिव में है बस आपकी आराधना सच्ची होनी चाहिए. कच्ची आराधना से काम नहीं होनेवाला. आपके इष्ट कोई भी हो सकते हैं, लेकिन शिव पूजन से तर्णरत लाभ संभव है और इससे आपके इष्ट भी प्रसन्न होंगे.
समाजसेवी बनवारी लाल सोती ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जबकि समारोह अध्यक्ष सत्यनारायण देवरालिया, संस्था के चेयरमैन गोविन्द ढाणेवाला सहित देवराज रावलवासिया, श्यामसुंदर बड़वावाला, मांगेलाल खरकिया, धर्मराज प्रेमराजका, दयानंद रावलवासिया, सत्यनारायण बुवानीवाला, घनश्याम दासगुप्ता, सुशील ओझा, राजेंद्र प्रसाद धनानिया, रतनलाल गोयल, रोशनलाल भिवानीवाला, अनिल बैद, बसंत गोयनका, हनुमान प्रसाद जमालपुरिया, उमराव लाल अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, श्यामसुंदर कैमरीवाल, इंद्रसेन जिंदल, मालचंद अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कमल कुमार अंचल, रविंद्र अग्रवाल व ईश्वर जमालपुरिया ने पं. लाटा जी को माल्यपर्ण कर उनसे आशीर्वाद प्रप्त किया. यह तीन दिवसीय कथा 28 जनवरी तक चलेगी.