कोलकाता : राज्य सरकार ने महानगर में 15 साल पुराने वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर महानगर में धड़ल्ले से पुराने वाहन चल रहे हैं. इस वजह से महानगर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है.
इस संबंध में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल में हलफनामा जमा किया है. राज्य के पर्यावरणविदों का आरोप है कि कोलकाता शहर में प्रदूषण नियंत्रित करने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही है. पहले देश में सबसे प्रदूषित शहर के रूप में दिल्ली का नाम आता था, लेकिन अब कोलकाता भी इसमें पीछे नहीं है.
वर्तमान वित्त वर्ष के प्रथम दिन ही नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार, पूरा कोलकाता शहर गैस चेंबर के रूप में बदल गया था. यहां के प्रदूषण का आंकड़ा नयी दिल्ली से भी आगे था. हालांकि प्रदूषण के कई कारण हैं, जिसमें वाहनों से निकलनेवाला धुआं भी प्रमुख कारक है.
पर्यावरणविदों का आरोप है कि सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अब भी महानगर में 15 व उससे अधिक वर्ष पुराने वाहन चल रहे हैं. केंद्र सरकार का दावा है कि अगस्त 2012 से अक्तूबर 2018 तक कोलकाता में 1,13,870 पुराने वाहनों का लाइसेंस रद्द किया गया है. पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रदूषण से मुकाबले के लिए वाहन मालिक जागरूक नहीं हैं, जिसकी वजह से यह हालत बनी हुई है.
वहीं, परिवहन संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठायी है. इस संबंध में राज्य के परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जमा किये गये हलफनामे की कॉपी देखने के बाद ही वह इस संबंध में कुछ कहेंगे. वहीं, 15 वर्ष पुराने वाहनों के संबंध में उन्होंने कहा कि अब कोलकाता व उसके आसपास के किसी भी आरटीओ में 15 वर्ष या उससे पुराने वाहनों के लाइसेंस का रिनिवल नहीं किया जा रहा.
