कोलकाता : बजट के पूर्व निवेशकों को विशेषज्ञों की वेट एंड वाच की सलाह

आनंद कुमार सिंह, कोलकाता : दो दिनों बाद पेश किये जाने वाले आम बजट के मद्देनजर शेयर विशेषज्ञ आम निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं. उनके मुताबिक जोखिम उठाने से बेहतर होगा वह ‘वेट एंड वाच’ की नीति अपनायें.डेको सिक्यूरिटीज के अजीत दे कहते हैं कि यह बजट अलग रहने वाला है. […]

आनंद कुमार सिंह, कोलकाता : दो दिनों बाद पेश किये जाने वाले आम बजट के मद्देनजर शेयर विशेषज्ञ आम निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं. उनके मुताबिक जोखिम उठाने से बेहतर होगा वह ‘वेट एंड वाच’ की नीति अपनायें.डेको सिक्यूरिटीज के अजीत दे कहते हैं कि यह बजट अलग रहने वाला है. चूंकि सामने चुनाव नहीं है इसलिए यह लोक लुभावन बजट नहीं होगा. सरकार के भी इस दिशा में जाने की उम्मीद कम है.

इसबार आमलोगों की अपेक्षाएं भी सरकार से नहीं रहने वाली. यह देखा जाना जरूरी है कि विकास को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है. वित्तीय घाटे को कम करने की दिशा में क्या कदम उठाये जाते हैं. वर्तमान में समूचे विश्व का शेयर बाजार सुस्त नजर आता है. भारत भी इससे अपवाद नहीं रहने वाला है. बेहतर यही होगा कि निवेशक बजट के बाद ही कोई फैसला लें.
कमोबेश इसी तर्ज पर शेयर विशेषज्ञ एसके कौशिक भी कहते हैं कि निवेशकों को वर्तमान में सतर्कता बरतनी चाहिए. शेयर सूचकांक बजट के बाद कहां जायेगा यह कहना मुश्किल है. इसलिए बेहतर यही होगा कि वह बजट का इंतजार करें. यदि वह निवेश करना ही चाहते हैं तो अगर उनका बजट एक रुपये का है तो वह 20 पैसे ही निवेश करें
. वर्तमान में भारतीय शेयर बाजार ‘ओवरहीटेड’ लगता है. सूचकांक के मौजूदा स्तर पर रहने का प्रत्यक्ष कोई कारण नहीं दिखता. सरकार बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक ध्यान दे सकती है. इसका असर सामग्रिक आर्थिक हालात पर कितना पड़ेगा, यह कहना कठिन है. बेहतर यही होगा कि निवेशक सतर्क होकर आगे बढ़ें.
वित्तीय घाटे को नियंत्रण में रखना सबसे बड़ी चुनौती
श्री बाहुबली स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री की सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय घाटे को नियंत्रण में रखने की होगी. जीएसटी का संग्रह और मानसून का पूर्वानुमान उत्साहवर्द्धक नहीं रहा है. बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर दी जायेगी.
इस तरह की नीतियों दीर्घमियादी अवधि के मार्केट लिए उत्साहवर्द्धक हैं, लेकिन अल्प मियादी मार्केट के लिए थोड़ा झटके वाला हो सकता है. चूंकि कॉरपोरेट आय बाजार के चढ़ाव से मेल नहीं खा रही है. इसलिए वे लोग बाजार उतार-चढ़ाव की संभावना है.

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