कोलकाता : वेस्ट बंगाल हेल्थ रेगुलेटरी कमीशन ने एक बार फिर महानगर के एक बड़े निजी अस्पताल पर जुर्माना लगाया है. इस बार हेल्थ कमीशन ने अस्पताल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
वहीं एक निजी डायग्नोसिस्ट सेंटर पर भी जुर्माना लगाया गया है. यह जानकारी कमीशन के चेयरमैन जस्टिस असीम कुमार राय ने दी. उन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर इसकी जानकारी दी.
चेयरमैन ने बताया कि अस्पताल में फिरदौस ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो जन्म के बाद से बीमार चल रहा था. शिशु को लैटरिन नहीं कर पा रहा है. इस समस्या के लिए तीन बार सर्जरी किया गया था. हालांकि सर्जरी के कुछ दिन बाद ही शिशु की मौत भी हो गयी.
इसके बाद मां फिरदौस ने इस मामले में कमिशन से शिकायत की. जांच के दौरान पाया कि शिशु के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गयी है. लेकिन इलाज कर रहे डॉक्टर का सर्टिफिकेट में गड़बड़ी मिला. डॉक्टर के पास केवल एबीबीएस की डिग्री थी. लेकिन वह खुद को पेट्रीयाट्रीक सर्जन बताकर अस्पताल से जुड़ा हुआ था.
चिकित्सक का दावा है कि उसके एमएस, एमसीएच तथा पीएचडी की डिग्री है. उसने यह डिग्री वेस्ट जर्मनी से प्राप्त की थी. इस संबंध कमीशन ने वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल से राय ली, तो पता चला की वेस्ट जर्मनी की उक्त डिग्री भारत में मान्य नहीं है. इस पर डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की.
इस मामले की सुनवायी के बाद हेल्थ कमीशन ने चिकित्सक के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. 15 दिनों के भीतर जुर्माना की राशि देने को कहा गया है. इस मामले में गत वर्ष अप्रैल में कमीशन से शिकायत की गयी थी. उधर एक निजी डायग्नोसिस्ट सेंटर पर भी गलत रिपोर्ट देने को लेकर जुर्माना लगाया गया है. तीन वर्षीय बच्ची की रक्त जांच की रिपोर्ट गलत दिया था.
