हल्दिया : सुबह से हो रही हल्की बारिश की परवाह किये बगैर शनिवार को रथयात्रा में लाखों लोगों की भीड़ पूर्व मेदिनीपुर के महिषादल में उमड़ी. इस वर्ष महिषादल की रथयात्रा अपने 241वें वर्ष में पहुंची है. पुरी व माहेश के बाद ही महिषादल की रथयात्रा का नाम आता है. रथयात्रा में देशभर के लोगों के अलावा विदेशियों की भीड़ भी देखने लायक थी. राज परिवार के हरप्रसाद गर्ग ने रथयात्रा की शुरुआत की. इस अवसर पर जिला पुलिस सुपर वी सैमुअल नेसकुमार, जिलापरिषद की सभाधिपति मधुरिमा मंडल, महिषादल पंचायत समिति के उपाध्यक्ष तिलक कुमार चक्रवर्ती व अन्य उपस्थित थे.
इतिहास के पन्नों को पलटा जाये तो पता चलता है कि राजा आनंदलाल उपाध्याय की धर्मपत्नी रानी जानकी देवी ने महिषादल रथ यात्रा की शुरुआत की थी. इसके बाद 1804 में रानी के निधन के बाद कुछ समय के लिए मतिलाल पांडेय को महिषादल की गद्दी मिली. तब उन्होंने बेहद सुंदर रथ तैयार करवाया. बाद में 1852 में तत्कालीन राजा लक्ष्मण प्रसाद गर्ग बहादुर ने रथ की मरम्मत के लिए कोलकाता से कुछ चीनी कारीगरों को बुलाया था. उस समय उन्होंने चार हजार रुपये खर्च कर रथ के चार कोने में चार मूर्ति बनवायी थी.
1912 में स्थानीय कारीगर माधव चंद्र दे ने रथ के सामने के लकड़ी के दो घोड़े बनाये थे. इसे अभी भी देखा जा सकता है. इधर जिले के मेचेदा में इस्कॉन की रथयात्रा में मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा आरंभ की. मेचेदा में इस्कॉन की रथयात्रा आठवें वर्ष में पहुंची है.
