डोडा हादसे में शहीद प्रद्युम्न को गांव में अंतिम विदाई

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को हुए भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवानों के शहीद होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया.

पुरुलिया.

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को हुए भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवानों के शहीद होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. इन शहीदों में पुरुलिया जिले के झालदा थाना क्षेत्र के पुष्टी गांव निवासी जवान प्रद्युम्न लोहार (26) भी शामिल थे. शनिवार सुबह जब ताबूत में बंद शहीद जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई.

हाइ स्कूल मैदान में अंतिम दर्शन

शहीद प्रद्युम्न लोहार के अंतिम दर्शन व श्रद्धांजलि के लिए पुष्टी हाइ स्कूल मैदान में लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा. गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे. माहौल गमगीन रहा व हर आंख नम दिखी.

जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी, प्रशासन पर सवाल

श्रद्धांजलि देने वालों में पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, बाघमुंडी के विधायक सुशांत महतो और पूर्व विधायक नेपाल महतो सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे. इस दौरान सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज एक वीर जवान शहीद हुआ है, पर केंद्र सरकार के अधीन होने के बावजूद कोई आइएएस या आइपीएस अधिकारी श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचा, जो दुखद है.

अधूरा रह गया घर लौटने का सपना

शोकाकुल परिजनों ने बताया कि हादसे से एक दिन पहले ही प्रद्युम्न ने घर फोन कर कहा था कि वह 5 फरवरी को छुट्टी लेकर घर आएंगे. लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया. बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखने वाले प्रद्युम्न का जीवन देशसेवा को समर्पित था. जनप्रतिनिधियों ने शहीद के परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया और उनकी स्मृति में कदम उठाने का वादा किया. पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी गई. आंसुओं से भरी आंखों के साथ गांववासियों ने अपने लाल को अंतिम विदाई दी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By AMIT KUMAR

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