तृणमूल का दावा, 120 परिवारों के करीब 300 मतदाता शामिल, भाजपा ने बताया ड्रामा

पात्रासयार ब्लॉक के कांकरडांगा चौराहे पर मंगलवार रात कथित दलबदल को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हो गया.

बांकुड़ा.

पात्रासयार ब्लॉक के कांकरडांगा चौराहे पर मंगलवार रात कथित दलबदल को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. तृणमूल ने दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में महत्व नहीं मिलने से 120 परिवारों के करीब 300 मतदाता भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल हो गए. वहीं भाजपा ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्तारूढ़ पार्टी का ड्रामा बताया.

परिवर्तन यात्रा के दौरान शुरू हुआ विवाद

मंगलवार को बिष्णुपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की परिवर्तन यात्रा निकाली गयी थी, जिसमें विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी शामिल थे. यात्रा बिष्णुपुर, जयपुर, कोतुलपुर, इंदास, खंडघोष, कांकरडांगा चौराहा और सोनामुखी से होकर गुजरने वाली थी. अन्य जगहों की तरह कांकरडांगा चौराहे पर भी मंच तैयार किया गया था. बताया गया कि तय समय से देर होने के कारण शुभेंदु अधिकारी इंदास के शसपुर इलाके में विशेष वाहन से उतरकर दूसरे वाहन से बरजोरा की सभा के लिए रवाना हो गये. इसके कारण वे कांकरडांगा और सोनामुखी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सके, जिसके बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया.

तृणमूल का दावा, भाजपा कार्यकर्ता हुए शामिल

तृणमूल के बिष्णुपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष सुब्रत दत्ता ने दावा किया कि इलाके के कई मतदाता नाराज थे. उनके अनुसार गुस्से का सामना करने के डर से शुभेंदु अधिकारी कांकरडांगा चौराहे पर नहीं रुके. उन्होंने कहा कि इसके बाद नारायणपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के 120 भाजपा कार्यकर्ता परिवार तृणमूल में शामिल हो गये. उन्होंने कहा कि भाजपा की परिवर्तन यात्रा इलाके में तृणमूल की विकास यात्रा में बदल गयी. इस दौरान सुब्रत दत्ता ने दलबदल करने वाले लोगों को तृणमूल का झंडा सौंपा.

भाजपा ने आरोपों को बताया साजिश

दूसरी ओर भाजपा ने तृणमूल के दावे को खारिज किया. स्थानीय भाजपा नेताओं ने कहा कि उनका कोई भी कार्यकर्ता या परिवार तृणमूल में शामिल नहीं हुआ. भाजपा का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले सुर्खियों में बने रहने के लिए तृणमूल ने अपने कार्यकर्ताओं को पार्टी का झंडा देकर यह कार्यक्रम आयोजित किया. इधर दलबदल करने वाले कुछ लोगों का कहना था कि वे परिवर्तन यात्रा में शामिल होने के लिए लंबे समय तक कांकरडांगा चौराहे पर इंतजार करते रहे, लेकिन शुभेंदु अधिकारी बिना रुके आगे निकल गये. उनका आरोप है कि उनकी भावनाओं की अनदेखी की गयी और इलाके में विकास पर भी ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला लिया.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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