अजय पर अस्थायी सेतु निर्माण फिर बंद, विदबिहार में फूटा जनाक्रोश

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा विदबिहार इलाके में अजय नदी से होकर जयदेव मेला जाने के लिए अस्थायी सेतु निर्माण कार्य दोबारा बंद होने के विरोध में बुधवार सुबह आसपास के सैकड़ों ग्रामीण नदी पर बने स्थायी सेतु पर जुट गये और टायर जला एवं नारेबाजी करते हुए विक्षोभ प्रदर्शन शुरू कर दिया.

By AMIT KUMAR | January 7, 2026 9:42 PM

पानागढ़.

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा विदबिहार इलाके में अजय नदी से होकर जयदेव मेला जाने के लिए अस्थायी सेतु निर्माण कार्य दोबारा बंद होने के विरोध में बुधवार सुबह आसपास के सैकड़ों ग्रामीण नदी पर बने स्थायी सेतु पर जुट गये और टायर जला एवं नारेबाजी करते हुए विक्षोभ प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके चलते वहां उत्तेजना फैल गयी और पश्चिम बर्दवान एवं बीरभूम जिले के बीच आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गयी. इसकी सूचना पाते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को सामान्य करने में जुट गया.

अस्थायी सेतु को लेकर बढ़ा असंतोष

ग्रामीणों ने बताया कि जयदेव मेला के लिए अस्थायी सेतु निर्माण की मांग को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया है. मामले में राज्य के पंचायत व ग्रामोन्नयन मंत्री प्रदीप मजूमदार ने सेतु के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया था और गलसी के विधायक नेपाल घरुई ने भी मौके पर पहुंच कर 10 दिनों के अंदर कार्य पूरा कराने की बात कही थी. उसके बाद बीडीओ सहित प्रशासनिक अधिकारियों भी नदी के पास निर्माण स्थल का मुआयना किया था.

विभागीय असहयोग से थमा काम

ग्रामीणों के अनुसार बाद में जटिलता का हवाला देकर अस्थायी सेतु निर्माण रोका गया. भाजपा के धरना प्रदर्शन के बाद फिर मंत्री के हस्तक्षेप से काम शुरू हुआ, लेकिन दो दिन बाद कांकसा प्रशासन के अनुरोध पर भी इलम बाजार सिंचाई विभाग ने सहयोग से इनकार कर दिया. मंगलवार शाम को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य बंद करा दिया, जिससे तनाव बढ़ गया. जयदेव मेला से पहले चिंता, बीरभूम

प्रशासन का रवैया ढुलमुल

ग्रामीणों का इल्जाम है कि बीरभूम जिला प्रशासन मामले में सहयोग नहीं कर रहा है. मंगलवार को गुस्साये लोगों ने सिंचाई विभाग के वाहन को घेर लिया था, जिन्हें बाद में पुलिस के आश्वासन पर छोड़ा गया. बुधवार सुबह काम शुरू नहीं होने पर फिर सड़क अवरोध किया गया. उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी मकर संक्रांति से जयदेव मेला शुरू होता है, जिसमें अजय नदी में स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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