आसनसोल.
सेवानिवृत्ति जीवन का वह महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां व्यक्ति अपने वर्षों की मेहनत का फल पाता है और आर्थिक सुरक्षा तब सबसे अहम हो जाती है. ऐसे में अवकाश नकदीकरण(लीव इनकैशमेंट) केवल एक वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि लंबे समय तक किये गये त्याग व समर्पण का प्रतीक है. हालांकि, लंबे समय तक इसके कर (टैक्स) के नियमों में असमानता बनी रही. जहां केंद्र और राज्य के कर्मचारियों को इस पर पूर्ण कर की छूट मिलती थी, वहीं निजी क्षेत्र, सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) और बैंकों के कर्मचारियों के लिए यह छूट मात्र तीन लाख तक सीमित थी. लगभग दो दशकों तक इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ, जबकि इस दौरान वेतन और मंहगाई में लगातार वृद्धि होती रही. इस असमानता को न्यायालय में चुनौती दी गयी. सीए नीलम वर्मा के अनुसार, कमल कुमार कालिया बनाम भारत संघ मामले के बाद सरकार ने 24 मई 2023 को अधिसूचना संख्या 31/2023 के माध्यम से इस सीमा को तीन लाख से बढ़ा कर 25 लाख रुपये कर दिया, जो एक महत्वपूर्ण सुधार था. लेकिन यहां एक नयी समस्या सामने आ गयी. यह संशोधन एक अप्रैल 2023 से लागू किया गया, जिससे इससे पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया. प्रश्न उठता है, क्या केवल रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर दो समान कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार उचित है? क्या 31 मार्च 2023 को रिटायर हुआ कर्मचारी, एक अप्रैल 2023 को रिटायर होने वाले से कम हकदार है? सीए श्रीमती वर्मा इस बारे में कहती हैं कि इसका उत्तर आयकर अधिनियम, 1961 की एक सशक्त, किंतु अपेक्षाकृत कम उपयोग की जाने वाली धारा-धारा 119(2)(बी) तथा सीबीडीटी की अधिसूचना संख्या 31/2023 दिनांक 24.05.2023 में निहित है. उक्त अधिसूचना में यह प्रावधान किया गया है कि यह एक अप्रैल 2023 से प्रभावी मानी जायेगी और इसके साथ संलग्न स्पष्टीकरण ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार के प्रभाव से ”किसी भी व्यक्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं किया जा रहा है”.नीलम वर्मा के मुताबिक, इस प्रावधान के तहत वे सेवानिवृत्त कर्मचारी, जिन्होंने पहले तीन लाख से अधिक राशि पर कर चुका दिया है, अब संबंधित प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/ मुख्य आयकर आयुक्त (पीसीआइटी/सीसीआइटी) के समक्ष आवेदन कर सकते हैं. हालांकि यह राहत स्वतः नहीं मिलती. करदाता को यह साबित करना होगा कि उसका दावा वास्तविक है और देरी के पीछे उचित कारण हैं. साथ ही, ऐसे आवेदन सामान्यतः संबंधित आकलन वर्ष के छह साल के अंदर होना चाहिए, तभी अतिरिक्त कर की वापसी(रिफंड) मिल सकती है. जो वर्ष 2020-21 में रिटायर किये हैं, वे 31 मार्च 2027 तक धारा 119(2)(बी) के तहत देर की माफी के लिए आवेदन कर सकते हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आइटीएटी) के हालिया निर्णयों ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख दिखाया है. न्यायाधिकरण ने माना है कि 25 लाख की सीमा एक लाभकारी संशोधन है और इसे पुराने मामलों में भी लागू किया जा सकता है, यदि मामला वास्तविक हो. यह केवल कर छूट नहीं, न्याय और समानता का प्रश्न है. अवकाश नकदीकरण पर बढ़ी राहत तब ही सार्थक होगी, जब इसका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, चाहे वह पहले से रिटायर हुआ हो या आगे होगा, क्योंकि सच्चा न्याय समय की सीमाओं में नहीं बंधता.
