बीमार काकोली को तीन वर्ष और बाकी 12 दोषियों को 10 वर्ष का सश्रम कारावास

ऐलान. बर्दवान तृणमूल में गुटीय झड़प के केस में फास्ट ट्रैक-सेकेंड कोर्ट के जज ने सुनायी सजा

वर्ष 2017 में बर्दवान तृणमूल में हुई थी झड़प, मामले में सोमवार को 13 लोग हुए थे दोषी करार बर्दवान/पानागढ़. पूर्व बर्दवान के बर्दवान तृणमूल कांग्रेस में गुटीय झड़प के वर्ष 2017 के एक मामले में बीते सोमवार को दोषी ठहराये गये 13 लोगों को चौथे दिन शुक्रवार को फास्ट ट्रैक सेकेंड कोर्ट के जज ने सजा सुना दी. मामले में दोषी बर्दवान महिला तृणमूल नेता काकोली गुप्त ता को बीमार होने से तीन वर्ष और बाकी 12 नेताओं व कार्यकर्ताओं को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी. बाद में मामले के सरकारी वकील हरिदास मुखर्जी ने बताया कि वर्ष 2017 में गुटीय झड़प के मामले में बीते सोमवार को काकोली गुप्त ता समेत 13 लोगों को दोषी करार दिया गया था. इस बीच, अदालत में कुछ न कुछ बाधा आने से सजा पर सुनवाई नहीं हो पा रही थी. आखिरकार शुक्रवार को फास्ट ट्रैक सेकेंट कोर्ट के जज ने तृणमूल नेता काकोली गुप्त ता को तीन वर्ष और बाकी 12 दोषियों को 10 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनायी. इससे पहले शुक्रवार को सुबह बर्दवान अदालत परिसर के बाहर तृणमूल नेताओं, कार्यकर्ताओं व समर्थकों की भारी भीड़ जुटी थी. कैंसरग्रस्त होने से काकोली गुप्त ता ने अपने लिए सजा में रियायत की अर्जी दी थी. उस पर विचार करते हुए जज ने बीमार काकोली को तीन वर्ष की कैद की सजा सुनायी. बाकी 12 दोषियों को सश्रम कारावास का दंड दिया. इससे पहले सभी दोषियों को पुलिस के कड़े पहरे में बर्दवान अदालत लाया गया था. अपराह्न 3:00 बजे के बाद फास्ट ट्रैक सेकेंड कोर्ट के जज ने सभी 13 दोषियों को सजा सुनायी. ध्यान रहे कि मामले में 13 लोगों को दोषी साबित होने पर मंगलवार को सजा सुनायी जानी थी. पर मंगलवार को चार दोषियों के बीमार पड़ने और शाम तक बर्दवान अदालत के फास्ट ट्रैक सेकेंड कोर्ट के जज अरविंद मिश्रा का झाड़ग्राम कोर्ट में तबादला हो जाने से सजा पर सुनवाई टल गयी. फिर अगले दिन बर्दवान अदालत के एक सीनियर वकील का देहांत हो गया, जिससे वकीलों का कामकाज बंद रहा. इसलिए अदालत में सजा पर सुनवाई नहीं हो पायी थी. मालूम रहे कि सरकारी वकील हरिदास मुखर्जी ने पहले बताया था कि बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में केस से संबंधित सेक्शन को लेकर कुछ जानकारी मांगी थी, जिस पर जज ने उनसे अपनी शंका साफ-साफ लिखित में रखने को कहा था. गुरुवार को बीमार काकोली गुप्त ता को छोड़ कर बाकी 12 दोषियों को अदालत में पेश किया गया था. काकोली का बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये और बाकी अन्य चार दोषियों के बयान कोर्ट में दर्ज किये गये थे. गौरतलब है कि वर्ष 2017 में बर्दवान सदर थाना क्षेत्र के नाड़ीग्राम दासपाड़ा में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें तत्कालीन पंचायत सदस्य जीवन पाल की एक आंख चली गयी थी, अगले दिन उनकी पत्नी संध्यारानी पाल की शिकायत पर बर्दवान थाने में काकोली गुप्त ता समेत 15 तृणमूल नेताओं, कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. फास्ट ट्रैक सेकेंड कोर्ट के जज अरिंदम मिश्र ने गत सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों के अभाव में दो लोगों को मामले से बरी कर दिया था. जबकि 13 नेताओं व कार्यकर्ताओं को गुनहगार करार दिया था, दोषियों में बर्दवान महिला तृणमूल-एक की नेता और बर्दवान उन्नयन संस्था की चेयरपर्सन काकोली गुप्त ता, तृणमूल युवा नेता व पंचायत कर्माध्यक्ष मानस भट्टाचार्य, नेता शेख जमाल, कार्तिक बाग समेत नौ अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया गया था.

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Published by: Ganesh mahto

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