जामुड़िया.
जामुड़िया विधानसभा-क्षेत्र में मतदाता-सूची संशोधन को लेकर उपजा विवाद अब राजनीतिक संग्राम में बदल गया है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(एसआइआर) प्रक्रिया के बाद जारी सूची से अचानक 13 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये जाने के विरोध में सोमवार को माकपा के नेतृत्व में जामुड़िया प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) कार्यालय का जोरदार घेराव कर प्रतिवाद जताया.दस्तावेज जमा होने के बावजूद नाम गायब
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रभावित मतदाताओं ने वर्ष 2002 की मतदाता सूची की प्रति और सभी आवश्यक दस्तावेज नियमानुसार जमा किए थे, फिर भी उनके नाम काट दिए गए। हैरानी की बात यह है कि कई वार्डों से सैकड़ों नाम एक साथ गायब हैं और एक वर्तमान वार्ड सदस्य का नाम भी सूची में नहीं है. माकपा नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही के बजाय एक ””सुनियोजित साजिश”” करार दिया है.
सांप्रदायिक व जातिगत भेदभाव का आरोप
सीपीएम जामुड़िया विधानसभा सचिव संबित कवि ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, यह कोई तकनीकी त्रुटि नहीं है. आदिवासी, मुस्लिम और दलित समुदायों के लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया है ताकि उन्हें मताधिकार से वंचित किया जा सके.वहीं, वरिष्ठ नेता मनोज दत्ता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग केंद्र और राज्य सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है. उन्होंने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस पर मिलीभगत का भी परोक्ष आरोप लगाया.
