103 वर्ष पुराने पीतल के रथ को दो मंत्रियों ने खींचा, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा रानीगंज

रानीगंज के सियारसोल राजबाड़ी में 103 वर्ष पुराने पीतल के रथ के साथ ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली गई। जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा.

रानीगंज : पवित्र रथयात्रा के अवसर पर रानीगंज के सियारसोल राजबाड़ी की ऐतिहासिक रथयात्रा गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में संपन्न हुई. करीब 103 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पीतल के रथ को पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के मंत्री डॉ. अजय पोद्दार और अग्निमित्रा पाल ने रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया.इस अवसर पर रानीगंज के विधायक पार्थ घोष, जामुड़िया के विधायक डॉ बिजन मुखर्जी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे.

नए राजबाड़ी से पुराने राजबाड़ी तक निकली रथयात्रा के दौरान पूरा इलाका "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा. भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलराम के दर्शन एवं रथ की रस्सी छूने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में भक्त इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने. रथयात्रा को लेकर पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी. मार्ग के विभिन्न स्थानों पर पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई.

103 वर्ष पुराना है पीतल का रथ

बताया जाता है कि वर्ष 1925 में सियारसोल राजबाड़ी का लकड़ी का रथ आग लगने से जलकर नष्ट हो गया था. इसके बाद राजपरिवार के प्रमथनाथ मालिया ने कोलकाता के प्रसिद्ध शिल्पकार प्रसाद चंद्र दास से इस भव्य पीतल के रथ का निर्माण कराया. रथ पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों की सुंदर नक्काशी की गई है, जबकि इसके शीर्ष पर राजपरिवार के कुलदेवता दामोदर चंद्र जिउ विराजमान हैं. पूरे वर्ष इस रथ को नए राजबाड़ी में सुरक्षित रखा जाता है.

रथयात्रा के अवसर पर यहां 15 दिनों तक चलने वाले पारंपरिक मेले का भी शुभारंभ हुआ. मेले में कृषि उपकरण, पौधों की नर्सरी, प्रसाधन सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, नागरदोला (झूले) और विभिन्न प्रकार के खान-पान के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इस मौके पर मंत्री अग्निमित्रा पाल और डॉ. अजय पोद्दार ने कहा कि रानीगंज की यह ऐतिहासिक रथयात्रा राज्य की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है और समाज में आस्था व सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती मिलती है.


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Author: Jitendra trivedi

Published by: Amleshnandan Sinha

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