केंद्र सरकार के अफसरों को ही नियुक्त करें पीठासीन अधिकारी

ध्यान रहे कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य में फर्जी मतदाताओं को चिह्नित करके उनके नाम मतदाता-सूची से कटवाने को लेकर अपने पार्टी नेताओं को कहा है.

मतदाता के आवासों से मतदान-केंद्रों तक तैनात हों सीएपीएफ नियंत्रित क्यूआरटी वैन आसनसोल के पूर्व मेयर ने राज्य में सीइओ को दिया छह सूत्री मांगों का ज्ञापन आसनसोल. राज्य में निष्पक्ष व शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए पीठासीन अधिकारी के रूप में राज्य सरकार के कर्मचारियों के बदले तटस्थ व पेशेवर रूप से प्रशिक्षित अफसरों (केंद्र सरकार के अधिकारी) को नियुक्त करने सहित कुल छह सूत्री मांगों लेकर वेस्ट बंगाल लिग्विस्टिक माइनॉरिटीज एसोसिएशन के अध्यक्ष व आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) मनोज अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा. श्री तिवारी ने पीठासीन अधिकारी के रूप में राज्य सरकार के अधिकारियों पर अनेकों मामलों में उनका कार्य सत्तारूढ़ पार्टी से प्रभावित होने का आरोप लगाया है. सीइओ मनोजअग्रवाल ने ज्ञापन स्वीकार किया और उनके सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया. ध्यान रहे कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य में फर्जी मतदाताओं को चिह्नित करके उनके नाम मतदाता-सूची से कटवाने को लेकर अपने पार्टी नेताओं को कहा है. इसे लेकर पूरे राज्य में मतदाता सूची के आधार पर तृणमूल के नेता व कार्यकर्ता मतदाता सूची सर्वे का काम कर रहे हैं. जो यहां नहीं रहते हैं उनका नाम संग्रह कर रहे हैं. इसे लेकर आसनसोल के पूर्व मेयर श्री तिवारी ने इसे लेकर सीइओ को बताया कि मुख्यरूप से भाषायी अल्पसंख्यक लोगों को ही निशाना बनाया जा रहा है, जिसकी बारीकी से जांच होनी चहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अल्पसंख्यक समूहों से संबंधित कोई भी वैध मतदाता का नाम अनुचित तरीके से न हटाया जाए. इसके साथ ही उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा कि मतदाताओं के आवासों से मतदान केंद्रों तक सीएपीएफ द्वारा नियंत्रित क्विक रेस्पांस टीम (क्यूआरटी) की वाहन की पेट्रोलिंग की व्यवस्था हो, जिससे मतदाता निडर होकर अपना मतदान कर सकें. शहरी इलाके के बड़े आवासीय परिसर में ही बूथ की व्यवस्था होने से मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा. इसके अलावा भी अनेकों मुद्दों पर श्री तिवारी ने सीइओ के साथ चर्चा की. श्री तिवारी ने कहा साजिश के तहत भाषायी अल्पसंख्यकों के अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है. मतदान में यदि भाषायी अल्पसंख्यकों की भागीदारी कम होने से उनके अधिकारों का और भी हनन होगा.

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Published by: Ganesh mahto

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