दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल में रेलवे ट्रेड यूनियन राजनीति के तहत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. दक्षिण-पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए आद्रा डिवीजन के सैकड़ो पदाधिकारियों और सदस्यों ने दक्षिण-पूर्व रेलवे मजदूर संघ का दामन थाम लिया है.
रविवार को आद्रा शहर के एक निजी होटल में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान यह दलबदल संपन्न हुआ. इस मौके पर दक्षिण-पूर्व रेलवे मजदूर संघ के उपाध्यक्ष अभय कुमार ओझा तथा संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी असित वरण दुबे मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति में मेंस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मजदूर संघ मैं शामिल किया गया.
मजदूर संघ का दामन थामने वाले राम चक्रवर्ती ने बताया कि रेल कर्मचारियों के अधिकारों के लिए निस्वार्थ भाव से संघर्ष करने और संगठन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उन सभी ने यह निर्णय लिया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि आद्रा डिवीजन में मेंस कांग्रेस की सभी 11 शाखाओं (ब्रांचों) के पदाधिकारी एवं सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं.
इस संबंध में मजदूर संघ के नेतृत्व ने खुशी जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नए सदस्यों के आने से आद्रा मंडल में रेल श्रमिकों की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान में तेजी आएगी, जिससे संगठन पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा.
दूसरी तरफ, पूरे घटनाक्रम पर मेंस कांग्रेस के आद्रा डिवीजन संयोजक निखिल चटर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर किसी को अपनी पसंद के संगठन में काम करने का अधिकार है.
हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजनीतिक बदलाव के आड़ में यदि कोई वास्तव में कर्मचारियों के हित में काम करे तो स्वागत योग्य है, लेकिन जो लोग संगठन या श्रमिकों के नाम पर अपने निजी स्वार्थ साधने की कोशिश में हैं, उससे अंततः नुकसान कर्मचारियों का ही होगा.उन्होंने दोहराया कि मेंस कांग्रेस बिना किसी दबाव के लगातार रेल श्रमिकों की भलाई और उनके अधिकारों के लिए समर्पित होकर काम करती रहेगी.
