एसआइआर शुरू होते ही दुर्गापुर की गलियों से कबाड़ी वाले गायब

शहर में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम जोर-शोर से चल रहा है. बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन में जुटे हैं.

दुर्गापुर.

शहर में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम जोर-शोर से चल रहा है. बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन में जुटे हैं. इसी बीच शहर के बेनाचिती सहित विभिन्न इलाकों में रोज सुबह दिखाई देने वाले पुराने टिन, लोहे व कांच खरीदने वाले कबाड़ी अचानक गायब हो गये हैं. आम दिनों में ठेला या साइकिल लेकर “टिन भांगा, कांच भांगा ” की आवाज देने वाले ये लोग अब सड़कों पर नजर नहीं आ रहे.

तालतला बस्ती में सन्नाटा

बताया जाता है कि यह कबाड़ी समूह प्रांतिका बस स्टैंड से सटी तालतला बस्ती में रहता था. अब वहां कई घरों पर ताले लटके हुए हैं. साइकिल और वैन सड़क किनारे खड़ी दिखती हैं, जिन्हें जंजीरों से बांध दिया गया है. इलाके के लोगों के बीच चर्चा है कि एसआइआर शुरू होते ही ये कबाड़ी अचानक यहां से चले गये.

मुर्शिदाबाद और बीरभूम से आये हैं कबाड़ी

स्थानीय सूत्रों के अनुसार यहां रहने वाले अधिकांश कबाड़ी दुर्गापुर के मूल निवासी नहीं हैं. उनमें बड़ी संख्या मुर्शिदाबाद और बीरभूम से आये लोगों की है. कुछ परिवारों को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि उनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय के लोग भी शामिल हैं. हालांकि कुछ कबाड़ियों के पास अपने वोटर कार्ड मौजूद हैं और वे पहले की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन कई घरों में ताले लगे देखे गये हैं.

स्थानीय लोगों में भ्रम और चर्चा

एसआइआर शुरू होते ही कबाड़ियों के अचानक गायब होने की वजह को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बस्ती में रहने वालों में लगभग आधे लोगों के पास अपने मूल स्थान के वोटर पहचान पत्र हैं. इस मुद्दे पर सीधे बोलने से अधिकतर लोग बचते दिखाई दिये, लेकिन इलाकों में सन्नाटा और ठेला-साइकिलों की कतारें बहुत कुछ कह रही हैं. शहर में एसआइआर का काम जारी है और इस बीच कबाड़ी समुदाय की अनुपस्थिति ने चर्चा और सवाल दोनों को जन्म दिया है.

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By Amit kumar

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