जीएसटी से महंगी हुई पढ़ाई, ढीली हो रही अभिभावकों की जेब

दुर्गापुर: जीएसटी को लागू एक साल होने को है. इसमें महंगा-सस्ता की चर्चा अब लगभग खत्म हो चुकी है. लेकिन शिल्पांचल के बच्चों के मां-बाप को जीएसटी का असर अब पता चल रहा है. पिछले साल तो सेशन शुरू होने के बाद जीएसटी लागू हुआ था. लेकिन इस साल नोटबुक से लेकर स्कूल बैग तक […]

दुर्गापुर: जीएसटी को लागू एक साल होने को है. इसमें महंगा-सस्ता की चर्चा अब लगभग खत्म हो चुकी है. लेकिन शिल्पांचल के बच्चों के मां-बाप को जीएसटी का असर अब पता चल रहा है. पिछले साल तो सेशन शुरू होने के बाद जीएसटी लागू हुआ था. लेकिन इस साल नोटबुक से लेकर स्कूल बैग तक के दाम बढ़े हुये मिल रहे हैं. ऊपर से पेट्रोल, डीजल की महंगाई के चलते स्कूल वैन वालों ने भी फीस बढ़ा दी है. अपने बच्चों की जरूरत के सामान लेने में शिल्पांचल के अभिभावको के पसीने छूट रहे हैं.
शहर के अभिभावक विजय अग्रवाल, आशिष बनर्जी, रामप्रसाद साव, गणेश मंडल ने बताया कि सेशन शुरू होने के बाद से लेकर अभी तक बच्चों के जरूरत के समान खरीदने पड़ रहे हैं. बच्चों की जरूरत का सामान लेने में पसीने आ गये. जीएसटी का बच्चों के एडुकेशन पर भी खासा प्रभाव पड़ा रहा है.
इसके तहत बच्चों की पढ़ाई के दौरान इस्तेमाल होने वाले अधिकतर प्रोडक्ट्स महंगे हो गए हैं. पिछले साल के मुकाबले इस साल नोटबुक्स, इंस्ट्रूमेंट बॉक्स, स्कूल बैग से लेकर वाटर बॉटल की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी दिख रही है. इधर स्कूल वैन वालों ने किराया में भी वृद्धि कर दी है क्योंकि पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ गए हैं.
पिछले साल एक जुलाई को जब जीएसटी लागू हुआ तब बच्चों के स्कूल के लिए जरूरी खरीदारी हो चुकी थी. इसलिए जीएसटी का असर अब पता चल रहा है. नोटबुक्स पर 12 फीसदी और दूसरे स्कूल आइटम्स पर 18 फीसदी तक जीएसटी लागू हो गया है. दुकानदार कह रहे हैं कि महंगाई के चलते लोग खुलकर खरीदारी नहीं कर रहे हैं और धंधा मंदा है. बच्चों की पढ़ाई लोगों की पहली प्राथमिकता होने के कारण लोग इसमें कटौती नहीं कर पा रहे हैं.

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