सांकतोड़िया : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) व उसकी सहायक कंपनियों के अधिकारियों के लिए वर्ष 2016-17 के लिए परफार्मेंस रिलेटेड पे (पीआरपी) भुगतान का आदेश जारी कर दिया गया. इससे इन कंपनियों के 18 हजार से अधिक अधिकारियों को लाभ मिलेगा. कोल इंडिया के महाप्रबंधक पीवीके आरएम राव के स्तर से कोल इंडिया व इसकी सभी सहायक कंपनियों के कार्मिक निदेशकों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है. इसके अनुसार कंपनियों के लिए तय उत्पादकता रेटिंग के आधार पर ही कोयला कंपनियों के अधिकारियों को पीआरपी भुगतान का लाभ मिलेगा.
पब्लिक इंटरप्राइजेज हर वर्ष सार्वजनिक उपक्रमों की एमओयू रेटिंग निर्धारित करती है. इसके तहत कोल इंडिया की भी सभी कंपनियों की रेटिंग निर्धारित होती है. बीते वित्तीय वर्ष में उत्पादन, उत्पादकता, सीएसआर, श्रमिक कल्याण, सामाजिक कल्याण एवं लाभ सहित विभिन्न बिंदुओं के आधार पर यह तय किया गया. वित्तीय वर्ष 2016-17 का एमओयू स्कोर निगमित आयोजना विभाग की ओर से जारी किया है. रेटिंग के आधार पर ही अधिकारियों को परफारमेंस रिलेटेड पे (पीआरपी) का निर्धारण किया जाता है. अब सीआइएल ने भी इस बारे में निर्देश जारी कर दिया है. इधर कम रेटिंग होने से ईसीएल के अफसरों को पीआरपी की राशि पर असर पड़ेगा.
उनका कहना है कि लगातार जमीनी स्तर पर काम करने के बाद भी कम स्कोर मिलना चिंता का कारण है. इससे उनका मनोबल भी गिरेगा तथा उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ेगा. सीएमपीडीआईएल में कार्यरत अधिकारी सिर्फ कार्यालयीन कामकाज निपटाते हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह रेटिंग तय की गई है- इसीएल को 51 .36 (गुड), बीसीसीएल को 72.76 (वेरी गुड), सीसीएल को 73 .04 (वेरी गुड), एनसीएल को 85.58 (वेरी गुड), डब्ल्यूसीएल को 41.40 (फेयर), एसईसीएल को 71.91 (वेरी गुड), एमसीएल को 71.39 (वेरी गुड), सीएमपीडीआईएल को 94.91 (एक्सलेंट) तथा कोल इंडिया को 47.90 (फेयर) मिला है.
कोयला अधिकारी संघ के एक सदस्य ने कहा कि लंबित पीआरपी भुगतान का आदेश जारी होना ठीक है. लेकिन इसका भुगतान भी जल्द होना चाहिए. पीआरपी भुगतान में भेदभाव भी नहीं होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो इससे अधिकारी का मनोबल गिरेगा. इससे कामकाज पर भी असर पड़ेगा. जो कंपनी कोयला उत्पादन नहीं करती है. जो कंपनी कोयला उत्पादन नहीं करती, उसे सर्वाधिक रेटिंग देना समझ से परे है. कोल अधिकारियों का वर्ष 2016-17 का पीआरपी भुगतान नहीं हो सका. अब प्रबंधन ने निर्देश जारी किया हैं. सेवानिवृत्त अधिकारी भी इससे वंचित हैं. कंपनी पीआरपी फंड में 500 करोड़ जमा हैं. इसका भुगतान हो जाना था, पर कंपनी ने भुगतान नहीं किया. सेवानिवृत्त होने के बाद अधिकारियों को राशि नहीं मिलने से परेशानी हो रही है. अभी तक वर्ष 2015-16 तक का ही पीआरपी भुगतान हो सका है.
