रूपनारायणपुर : सालानपुर प्रखण्ड के 31 मौजा इलाके में पानी की समस्या समाप्त करने के लिए लिए दो जल परियोजनाएं -कांसकुली वाटर प्रोजेक्ट और डालमिया वाटर प्रोजेक्ट तकनीकी समस्या के कारण अधर में लटक गयी है. सदर आसनसोल महकमा शासक प्रलय रायरचौधरी ने कहा कि डालमिया प्रोजेक्ट के लिए इसीएल की एनओसी चाहिए और कांसकुली प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
सालानपुर प्रखण्ड के विभिन्न इलाकों के कोयला खदानों के आसपास होने के कारण यहां पानी की समस्या है. तेजी से आवासीय निर्माण होने से भूमिगत जल का दोहन भी भारी पैमाने से होने के कारण अनेकों इलाके में भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे चला गया है. छह सौ फीट बोरिंग करने पर भी पानी नहीं मिल रहा है. सालानपुर में पहले से ही रही पानी की समस्या और भी बढ़ती जा रही है. इसके स्थायी समाधान के लिए कांसकुली वाटर प्रोजेक्ट दो वर्ष पूर्व आरम्भ हुआ.
इसमें अजय नदी के बेड में बोरिंग कर पानी निकालने और उस पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में फिल्टर कर रिजर्वर में भेजने तथा रिजर्वर से पानी गांवों में भेजा जाना है. इसके तहत सालानपुर प्रखण्ड के डाबर और मल्लाडीह में दो रिजर्वर का निर्माण हुआ. एक रिजर्वर का कार्य एक साल पहले ही पूरा हो चुका है. दूसरे रिजर्वर का कार्य अंतिम चरण में है. इस परियोजना से सालानपुर प्रखण्ड के 27 और बाराबनी प्रखण्ड के चार कुल मौजा के लोग लाभान्वित होंगे. अजय नदी में बोरिंग का कार्य नहीं हुआ है और सबसे बड़ी समस्या अजय नदी से रिजर्वर तक 15 किलोमीटर की पाईप लाईन बिछाने का कार्य अधूरा पड़ा है.
पाईप की सप्लाई पीएचईडी के स्तर से होनी है. पाइप बिछाने के लिए निविदा जारी हुयी. लेकिन यह निविदा 2012 के एसओआर के आधार पर होने के कारण किसी भी एजेंसी ने निविदा में भाग नहीं लिया. महकमा शासक श्री रायरचौधरी ने कहा कि नये एसओआर के आधार पर पाईप लाईन बिछाने की निविदा पुनः जारी की जायेगी. डालमिया वाटर प्रोजेक्ट में इसीएल के परित्यक्त खदान डालमिया में जमा पानी को फिल्टर कर रिजर्वर में भेजा जाना है. वहां से पाईप लाईन के जरिये गांवों में सप्लाई की जायेगी. इस परिजोजना से चार मौजा के निवासी लाभान्वित होंगे. यहां डालमिया ओसीपी से पानी सालानपुर ग्राम पंचायत के पास बने फिल्टर प्लांट में लाना है. इसके लिए इसीएल सालानपुर एरिया के रेलवे साइडिंग के ट्रैक को पार करना है.
जिसकी मंजूरी रेल प्रबंधन देगा. रेल प्रबंधन ने कहा कि इसीएल के एनओसी के बगैर वह अनुमति नहीं दे सकता है. इसीएल प्रबंधन ने बताया कि फिलहाल यहां से तीन मिलियन टन कोयला रैक से जाता है. डालमिया में नयी लोडिंग साइडिंग बनेगी. इसकी क्षमता छह मिलियन टन की हो जायेगी. प्रतिदिन औसतन छह रैक कोयला निकलेगा. ट्रैक के नीचे से यदि पाईप लाईन हो और वह किसी कारण खराब हो जाये तो उसकी मरम्मत के लिए समस्या हो जायेगी. इसपर एनओसी देने के लिए तकनीकी एक्सपर्ट की सलाह ली जायेगी. महकमा शासक श्री रायरचौधरी ने कहा कि जैक पुसिंग तकनीक के जरिये पाईप को ट्रैक के नीचे से लाया जायेगा. पाईप खराब हो जाने पर भी मरम्मत के लिए इसीएल का कोयला ढुलाई बाधित नहीं होगा. इसे लेकर प्रबंधन के साथ बैठक की जायेगी.
