रूपनारायणपुर : हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) के बंद होने के डेढ़ साल बाद भी श्रमिकों के सम्पूर्ण बकाया का भुगतान नहीं हुआ. एचसीएल वोलेंटियर रिटायरमेंट एंड रिटायर इम्प्लाइज कमेटी ने पूर्व कर्मियों की सभी बकाया राशि की भुगतान तत्काल करवाने को लेकर सीएमडी को पत्र लिखा. श्रम मंत्रालय ने इस पत्र को संज्ञान में लिया. मंत्रालय के उपनिदेशक अरुण जैन ने आवेदनकारी संगठन को पत्र भेजकर सूचित किया कि बकाया भुगतान पर जरूरी कदम उठाने के लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय को पत्र दिया गया है और इस विषय में हुयी कार्यवाई की जानकारी मांगी है.
श्रमिकों की कौन कौन सी राशि बकाया
पूर्व श्रमिकों के संगठन के कानूनी सलाहकार हरिशंकर चट्टोपाध्याय ने बताया कि वर्ष 1992 और 1997 के वेतन समझौते के आधार पर पीएफ के एरियर का भुगतान हो गया है, लेकिन वेज एरियर का भुगतान नहीं हुआ है. 1992 के वेज समझौता 31 जुलाई 1995 को हुआ. 30 जून 1995 को जो श्रमिक अवकाश ग्रहण किये, उन्हें कंपनी ने वेज एरियर का भुगतान नहीं किया. 1997 का वेज समझौता 31 मार्च 2001 को हुआ. इस अवधि का भी वेज एरियर का भुगतान नहीं हुआ.
अवकाश ग्रहण के बाद जिन श्रमिकों ने कंपनी का आवास खाली नहीं किया था. उन श्रमिकों के ग्रेय्चूटी की राशि रोक दी गयी थी. जिसका भुगतान कंपनी ने किया लेकिन व्याज नहीं दिया. इसके साथ इसकी डिफरेंशियल भुगतान का व्याज और 60 वर्ष के आधार पर एलआईसी से श्रमिकों की ग्रेय्चूटी की राशि संग्रह कर 58 वर्ष के आधार पर भुगतान हुआ. दो वर्ष की बकाया राशि व्याज सहित भुगतान करने के अलावा वर्ष 1974-75 और 1975-76 में इमरजेंसी के दौरान सरकार ने बोनस की राशि 8.33 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत कर दी थी.
जिसके खिलाफ श्रमिकों ने अदालत में मामला किया. श्रमिकों की जीत हुई लेकिन राशि का अब तक भुगतान नहीं हुआ. संस्था में आर्थिक घटा के कारण छुट्टी बिक्री, एलटीसी, एचटीसी सभी के भुगतान को बंद कर दिया गया था. लेकिन यह सिर्फ रूपनारायणपुर इकाई में लागू हुयी. अन्य इकाई के श्रमिकों को सब कुछ मिलता रहा. यह सारी बकाया राशि की भुगतान के लिए पत्र लिखा गया । श्रम व रोजगार मंत्रालय ने एचसीएल की बंदी की कंडिसनल अप्रूवल दी है. जब तक श्रमिकों के सम्पूर्ण बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता है, इसकी बंदी की मंजूरी श्रम मंत्रालय से नहीं मिलेगी.
