बर्नुपर : नेशनल कंपनी लॉ ट्रब्यूनल (एनसीएलटी) के निर्देशानुसार बर्न स्टैडर्ड कंपनी को 31 मई को कारखाना हमेशा के लिए बंद कर दिया गया. इसके साथ ही बर्नपुर में स्थित एक बड़े कारखाने में सौ वर्ष पूरे करने के साथ ही विदाई ले ली. केंद्र में भाजपा नीत एनडीए की सरकार गठित होने के बाद पश्चिम बर्दवान जिले का यह दूसरी प्रतिष्ठित कंपनी है जिसने दम तोड़ दिया.
इस कारखाने में मालगाड़ी के विभिन्न प्रकार व आकार के डिब्बे बनाये जाते थे. सनद रहे कि केन्द्र सरकार ने वर्ष 2017 के मार्च महीने में बर्न स्टैडर्ड कंपनी को दिवालिया घोषित कर एनसीएलटी कोर्ट में भेज दिया था. जिसके खिलाफ बर्न स्टैडर्ड सेव कमेटी ने हाई कोर्ट में केस किया. 26 मार्च, 2018 को एनसीएलटी कोर्ट ने सौ फीसदी वीआरएस के साथ कारखाने को बंद करने का निर्णय लिया था.
जिसके तहत 417 करोड़ रूपये आलंटित किये गये थे. जिसमें से 280 करोड के रूपये का कर्ज की रकम अदा करना शामिल था. कोर्ट ने तीन महीने के भीतर 31 मई तक कारखाने को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय दिया था. कोर्ट अपने निर्णय को सुरक्षित रखते हुये मामला केबिनेट में अंतिम निर्णय को केबिनेट के लिए भेज दिया था.
कारखाने में 292 कर्मियों को वीआरएस लेने के लिए सीएमडी मुहम्मद अरसद के निर्देश पर महाप्रबंधक आरती गांगुली ने नोटिस जारी किया. जिसके बाद यूनियन ने इसका विरोध किया. तत्पश्चात् यूनियन को कोलाकाता कार्यालय में सीएमडी मुहम्मद अरसद के साथ बैठक हुयी. जिसमें साफ साफ बताया गया कि यदि कोई कर्मी 31 मई से पहले तक वीआरएस भर कर जमा नहीं करेगा. उसका वित्तीय हानि झेलना पड़ सकता है. उसके बाद 292 कर्मियों ने 31 मई के पहले अपने वीआरएस फॉर्म जमा कर दिये.
31 मई 2018 को अंतिम दिन कारखाने से निकलते हुये लोगो एक दूसरे से एक ही सवाल कर रहे थे. वीआरएस की राशि का भुगतान कब तक होगा? आईएसडब्लू वर्कर्स यूनियन (एचएमएस) नेता आशीष बाग से कहा कि वर्ष 2017 के मार्च महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केबिनेट में बर्न स्टैडर्ड कारखाने को बंद करने का निर्णय लिया. साथ ही मामले को नीति आयोग में भेज दिया. नीति आयोग के चेयरमैन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बर्न स्टैडर्ड को दिवालिया घोषित कर बंद करने की घोषणा कर दी.
31 मई 1918 में बर्न स्टैडर्ड कंपनी की स्थापना हुयी थी. 31 मई को कारखाने के स्थापना दिवस के दिन क्लोजर किया गया. सौ वर्ष के कारखाने को केन्द्र सरकार ने बंद कर दिया. देश में एक सडक के निर्माण पर केन्द्र सरकार करोडो की धनराशि खर्च कर रही है. कारखाने के पुनरोद्धार के लिए यदि केन्द्र सरकार मद राशि दे देती तो कारखाना फिर से शुरू हो सकता था.
वीआरएस के लिए प्राय: सभी लोग भर चुके है. आसनसोल आयरन एंड स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक) नेता जसपाल सिंह ने कहा कि 31 मई को क्लोजर का अंतिम समय दिया गया था. 292 कर्मियों में से सभी ने अपना वीआरएस भर दिया है. कुछ अधिकारियो का बाकी था. प्रथम लिस्ट वीआरएस का निकाला जा चुका था. पिछले कुछ रिटायर्डमेंट का ग्रेच्यूटी की राशि नहीं मिली है.
दो दिनो से बैको की हड़ताल चल रहा था. एक जून से बैंक खुलने के बाद कट ऑफ का प्रिंट मिलेगा. पहले अवकाश वालो का ग्रेच्युटी का भुगतान होगा. उसके बाद वीआर बेनिफिट मिलेगा. शाम में महाप्रबंधक आरती गांगुली से मुलाकात कर नोटिश के बारे में जानकारी ली गयी. अभी तक कुछ जानकारी नहीं मिली है. रात 12 बजे भी नोटिश लगने से कारखाने में ताला जड दिया जायेगा.
फिलहाल नोटिश के बारे में काई जानकारी अभी नहीं मिली है. बर्न स्टैडर्ड इंप्लाइज यूनियन (सीटू) के देवाशीष कर्मकार ने कहा कि अभी तक नोटिश जारी नही किया गया है. लेकिन कोर्ट के निर्देशानुसार 31 मई को अंतिम समय दिया गया था. 292 कर्मियों ने वीआरएस फॉर्म भर दिया है. शाम को महाप्रबंधक सुश्री गांगुली से मुलाकात की गयी थी. उन्होने अभी तक नोटिश के बारे में जानकारी नहीं दी है.
