दुर्गापुर : श्रीरामपुर पंचायत इलाके में स्वच्छता पखवाड़ा के मद्देनजर गांवों में ड्रिंकिंग जल के संसाधनों के स्थिरीकरण के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. इस दौरान स्वास्थ्य निरीक्षक रजतकांति खट्टुवा और अबीक गुहा ने पेयजल की शुद्धता को लेकर विस्तृत चर्चा करते हुए उन्हें स्वच्छ पेयजल का लाभ तथा जल को शुद्ध रखने के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
मौके पर रजतकांति खट्टुवा ने बताया कि रोगाणुओं, जहरीले पदार्थों एवं अनावश्यक मात्रा में लवणों से युक्त पानी अनेक रोगों को जन्म देता है. बीमारियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रदूषित पानी का ही हाथ होता है. प्रति घंटे कई बच्चों की मृत्यु मात्र अतिसार के कारण हो जाती है. यह प्रदूषित जल के कारण होता है. यही वजह है कि केन्द्र सरकार की ओर से लोगों का जीवन बचाने की दिशा में निरन्तर कार्य किया जा रहा है.
चूंकि पेयजल ही जीवन का आधार है. इस वजह से सरकार पेयजल की शुद्धता पर विशेष ध्यान दे रही है. जल निकायों के पर्यावरण प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव कम करने और मानव गतिविधियों की वजह से प्रभावित क्षेत्रों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता है. इसके लिए सामूहिक भागीदारी जरूरी है. तमाम विकसित देश सामूहिक भागीदारी के जरिए अपने पेयजल को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया में लगे हैं, लेकिन विकसित देशों में जागरुकता का अभाव होने की वजह से पेयजल शुद्धता पर उस तरह का ध्यान नहीं दिया जा सका है, जिसकी जरूरत है.
हालांकि सुनियोजित जल और स्वच्छता हस्तक्षेप ने अनेक रोगों को कम करने में प्रभावी असर दिखाया है. शिविर में श्रीरामपुर पंचायत के चार गांव के लोग उपस्थित थे. मौके पर लोगों के बीच ब्लीचिंग पाउडर भी वितरित किये गये. मौके पर डायरिया के दौरान ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) के उपयोग के बारे में लोगों को जानकारी दी गई तथा ओआरएस बनाने की विधि भी लोगों को बतायी गयी.
