भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए हर स्थान पर आते हैं भगवान

आसनसोल : कन्यापुर हाई स्कूल के निकट ज्योति जिम के समक्ष दस दिवसीय श्रीमदभागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति महायज्ञ के पांचवे दिन शनिवार को श्रीधामवृंदावन के आचार्य मृदूलकृष्ण गोस्वामी जी ने अपने अमृत प्रवचनों से भक्तों को भाव विभोर कर दिया. उन्होंने श्रीकृष्ण चरित्र का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया. आचार्य ने कहा कि भक्त के […]

आसनसोल : कन्यापुर हाई स्कूल के निकट ज्योति जिम के समक्ष दस दिवसीय श्रीमदभागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति महायज्ञ के पांचवे दिन शनिवार को श्रीधामवृंदावन के आचार्य मृदूलकृष्ण गोस्वामी जी ने अपने अमृत प्रवचनों से भक्तों को भाव विभोर कर दिया. उन्होंने श्रीकृष्ण चरित्र का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया.
आचार्य ने कहा कि भक्त के भाव को अपने इष्ट के प्रति भक्त की आस्था को केवल और केवल प्रभु ही समझ सकते हैं. इसलिए जीव को अपना दुख संसार के सामने नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिए. प्रभु को पालनहार बताते हुए आचार्य ने कहा वे शरण में आये हुए भक्तों के सारे दुखों को हर लेते हैं. भागवत सप्ताह कथा महोत्सव में अध्यात्मिक उदगार व्यक्त करते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान का परम भक्त प्रहलाद जिसे उसके पिता हिरण्यकशिपु के द्वारा अति भयंकर कष्ट दिये गये.
यहां तक कि श्री प्रहलाद को विष पिलाया गया , हाथी से कुचला गया, अग्नी में जलाया गया. तरह तरह की यातनाएं दी गयीं. परंतु श्री प्रहलाद हर जगह अपने प्रभु का ही दर्शन करते थे. इसलिए उन्हें कहीं भी किसी भी प्रकार की पीड़ा का एक जरा सा भी अहसास नहीं हुआ. उन्हें विश्वास था कि हमारे प्रभु सदा सर्वदा सर्वत्र विराजमान रहते हैं. तो प्रभु श्रीनरसिंह भगवान भक्त के विश्वास को पूर्ण करते हुए खंभा से प्रकट होकर यह दिखा दिया कि भक्त की इच्छा एवं विश्वास को पूर्ण करने के लिए वह कहीं भी किसी भी समय प्रकट हो सकते हैं. आचार्य श्री ने कहा कि जीव को किसी की निंदा स्तुति करने के बजाय भगवान की ही चर्चा करनी एवं सुननी चाहिए.
प्रभु चरित्रों को श्रवण करने से भगवान का चिंतन करने से प्रभु की कृपा प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि विशाल पेड जिस प्रकार छोटीसी कुल्हाडी से कट जाता है उसी प्रकार प्रभु के चरण कमल का स्मरण करने से जीव के सारे पाप कट जाते हैं. इसके लिए उसे प्रभु की शरण में आना होगा. प्रभु की हर इच्छा प्रत्येक लीला को प्रसन्नता से स्वीकार करने वाला ही सच्चा भक्त होता है. भक्त को अपने आदर सत्कार या सम्मान की कामना नहीं होती है.
वह तो हर कार्य प्रभु की सेवा समझकर करता है और ऐसी भावना को ही प्रभु स्वीकार करते हैं. वह तो केवल भाव के भूखे हैं. क्योंकि परमात्मा न तो साकार है न निराकार हैं. वो तो भक्त की इच्छा के अनुसार तदाकार हैं. जैसे भक्त चाहता है. उसे उसी रूप में प्रभु प्राप्त होते हैं. कथा प्रसंग में विशेष महोत्सव के रूप में आज श्रीकृष्ण जन्म नंदोत्सव विशेष धूम धाम से मनाया गया. प्रभु के प्रकट होने पर गोपियां बधाई का सामान लेकर आई और व्यासपीठ भागवत जी में चढाया गया. अवसर पर रामविलास, नूनी गोपाल मंडल, आल्पना मंडल आदि सहित समस्त भक्त उपस्थित थे.

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