कोल कंपनियों को डिस्पैच बढ़ाने का निर्देश

सांकतोड़िया : कोल इंडिया की सभी आनुषंगिक इकाइयों की खदानों में 35 मिलियन टन कोयला स्टॉक हैं. इसीएल समेत सभी कंपनियों को बारिश से पहले अधिक से अधिक कोल डिस्पैच कर स्टॉक खत्म करने को निर्देश कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने दिया हैं. उन्होंने कहा कि देश में ऊर्जा की ब़ढ़ती मांग एवं थर्मल पावर […]

सांकतोड़िया : कोल इंडिया की सभी आनुषंगिक इकाइयों की खदानों में 35 मिलियन टन कोयला स्टॉक हैं. इसीएल समेत सभी कंपनियों को बारिश से पहले अधिक से अधिक कोल डिस्पैच कर स्टॉक खत्म करने को निर्देश कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने दिया हैं.
उन्होंने कहा कि देश में ऊर्जा की ब़ढ़ती मांग एवं थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की भारी कमी हैं. इस कमी को दूर करना होगा ताकि पॉवर जेनरेशन में कोई कमी नहीं हो. वित्तीय वर्ष 2017-18 में कोल इंडिया लिमिटेड ने 580.3 मिलियन टन कोयला विभिन्न उपक्रम को डिस्पैच किया, जो पिछले वर्ष 2016-17 में 543.3 एमटी की तुलना में लगभग सात फीसदी अधिक है.
इसमें पावर प्लांट को लगभग 454.3 मिलियन टन कोयला दिया गया. कोयला क्षेत्र से जु़ड़े जानकारों का कहना है कि इसके बाद भी ईसीएल समेत कोल इंडिया की अन्य अनुषांगिक कंपनियों की खदान में लगभग 35 मिलियन टन कोयला स्टॉक में पड़ा हुआ है. गर्मी के दिनों में कोयला में आग लग जाती है, इसलिए कोल मंत्रालय सभी उपक्रमों को कोयला डिस्पैच करने पर जोर दे रहा है. मंत्रालय ने सभी कंपनियों के अफसरों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा है कि स्टॉक में डंप पड़ा कोयले का स्टॉक अविलंब खत्म किया जाए, ताकि पावर प्लांट को पर्याप्त कोयला आपूर्ति हो सके. हालांकि देश के कुछ पावर प्लांट की ही स्थिति क्रिटिकल है, पर अन्य पावर प्लांट के पास कोयला स्टॉक है.
इसके साथ ही रेलवे को भी पर्याप्त मात्रा में रैक उपलब्ध कराने कहा है,
ताकि खदान से कोयला उठाव हो सके. उन्होंने कहा कि पावर प्लांट में कम से कम 20 दिन को कोयला स्टॉक होना चाहिए, ताकि प्लांट परिचालन में दिक्कत न हो. बरसात में कोयला उत्पादन प्रभावित होता है, इसलिए पावर प्लांट प्रबंधन गर्मी में ही अधिक से अधिक कोयला मंगा कर स्टॉक करते हैं. कुछ ही उद्योग में निर्धारित मात्रा से कम कोयला स्टॉक है. यही वजह है कि कोल कंपनियों को अधिक डिस्पैच कर सभी उपक्रम में स्टॉक देने कहा है, ताकि आगामी दिनों में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
वित्तीय वर्ष में सीआइएल ने सभी कोल कंपनियों को लगभग 600 एमटी कोयला उत्पादन करने का टारगेट दिया है. ईसीएल समेत अन्य सभी कंपनियों ने अभी से उत्पादन में इजाफा कर दिया है. ईसीएल प्रतिदिन एक लाख पैंतीस हजार टन से भी ज्यादा कोयला उत्पादन कर रहा है. इसीएल फिलहाल बीते वित्तीय वर्ष की अपेक्षा चालू वित्त वर्ष में उत्पादन में 34 प्रतिशत का ग्रोथ में हैं डिस्पैच एवं ओबीआर में भी ग्रोथ चल रहा हैं. भूमिगत खदानों में ग्रोथ में कमी आई हैं इसका कारण हैं झांझरा प्रोजेक्ट में सीएम मशीन को खराब होना है. इसके साथ ही उत्पादित संपूर्ण कोयला डिस्पैच करने का भी दबाव बना हुआ है.

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