आसनसोल : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) के नये स्थायी चेयरमैन अनिल कुमार झा झारखंड के पहले ऐसे कोल अधिकारी हैं, जिन्होंने सीसीएल में बतौर पीओ से लेकर कोल इंडिया के चेयरमैन तक का सफर तय किया है. श्री झा मूलत: झारखंड के गोड्डा जिला के मोलनाकिता गांव के निवासी है.
सीसीएल के राजमहल से सेवानिवृत्त अधिकारी एके ठाकुर के रिश्ते में बहनोई तथा कोल इंडिया के पूर्व सीएमडी आरएन मिश्रा के रिश्ते में भतीजे श्री झा सेवानिवृत्ति की तिथि 31 जनवरी, 2020 तक कोल इंडिया के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे.
32 साल का लंबा सेवाकाल
श्री झा फिलहाल कोल इंडिया की अनुषांगिक यूनिट महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल) के सीएमडी थे. मालूम हो कि कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी ने उनके नाम की अनुशंसा शुक्रवार को कोल इंडिया चेयरमैन के पद पर की थी. इन्होंने एमसीएल में सीएमडी का कार्यभार जनवरी, 2015 में संभाला था.
एमसीएल से पहले वे मॉयल लिमिटेड में निदेशक (उत्पादन एवं योजना) थे. अपने 32 साल के लंबे सेवाकाल में वे माइन प्लानिंग, उत्पादन प्रबंधन पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के क्षेत्र में अच्छे अनुभवी माने जाते हैं. उन्हें ओपेन कास्ट कोयला खदानों के साथ-साथ भूमिगत कोयला में भी काम करने का अनुभव है.
माइन प्लानिंग एंड डिजाइन में विशेषज्ञ
श्री झा ने आइएसएम (धनबाद) से माइन प्लानिंग एंड डिजाइन में एमटेक किया है. उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत 1983 में सीआइएल की सहायक कंपनी सीसीएल मुख्यालय से की. अरगड्डा एरिया के जीएम के साथ ही बड़का सयाल एरिया में स्टॉफ ऑफिसर तथा उरीमारी में परियोजना पदाधिकारी रहे. सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह एवं कार्मिक निदेशक आरआर मिश्रा के कार्यकाल में वे अरगड्डा एरिया में जीएम रहे.
एकीकृत बिहार के चार अधिकारी बने चेयरमैन
श्री झा से पहले एकीकृत बिहार से भी चार अधिकारियों ने कोल इंडिया के चेयरमैन के पद तक का सफर तय किया था. इनमें एसके चौधरी स्थायी चेयरमैन रहे. जबकि शशि कुमार, एनके झा के साथ-साथ गोपाल सिंह प्रभारी चेयरमैन रहे. बीच में आइएएस अधिकारी नरसिंहा राव, एके दूबे, सुतीर्थ भट्टाचार्या कोल इंडिया के चेयरमैन रहे.
अरसे बाद कोल इंडिया को चेयरमैन के रूप में बेहतर टेक्नोक्रेट मिला है. गत 19 अप्रैल को अचानक कोयला मंत्रालय के अपर सचिव सुरेश कुमार को कोल इंडिया चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया. माह भर के अंदर मंत्रालय ने श्री झा के रूप टेक्नोक्रेट को चेयरमैन के पद पर स्थायी रूप से नामित कर दिया.
एक नजर नौ माह के विकास पर
अगस्त,2017 में आंध्र कैडर के आइएएस अधिकारी सुतीर्थ भट्टाचार्या चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हुए. एक सितंबर को सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह को कोल इंडिया चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. 19 अप्रैल को कैबिनेट की अप्वाइंमेंट कमेटी ने गोपाल सिंह की जगह अपर कोयला सचिव सुरेश कुमार को अतिरिक्त प्रभार देने की सिफारिश की. 24 अप्रैल को उन्होंने चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया. 18 मई को श्री झा के नाम की अनुशंसा की गयी.
एके झा झारखंड के पहले अधिकारी जो पीओ से पहुंचे चेयरमैन तक
कोल इंडिया के चेयरमैन बनने के लिए पिछले नौ माह से राजनीतिक लॉबी काफी तेज थी. इसमें खास कर कोल इंडिया के दो अधिकारी क्रमश: सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह तथा डब्ल्यूसीएल के सीएमडी आरआर मिश्रा का नाम चेयरमैन के लिए प्रमुखता से सामने आ रहा था.
पूर्व चेयरमैन सुतीर्थ भट्टाचार्या के बाद एक सितंबर, 2017 को जब गोपाल सिंह सीआइएल के चेयरमैन बने तो उसी समय से यह कयास लगाया जा रहा था कि कोल इंडिया के स्थायी चेयरमैन पद पर अंतत:
वे ही काबिज होने में सफल होंगे. इसके बाद दो बार प्रभारी चेयरमैन पद पर कोयला मंत्रालय द्वारा मिले विस्तार ने मंत्रालय में उनकी लॉबी को और पुख्ता कर दिया. कोयला मंत्री पीयूष गोयल तथा कोयला सचिव सुशील कुमार के काफी करीबी माने जानेवाले श्री सिंह गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भी काफी करीबी माने जाते हैं. यही कारण है कि स्थायी चेयरमैन बनने की दौड़ में वे सबसे आगे चल रहे थे.
साथ ही डब्ल्यूसीएल के सीएमडी श्री मिश्रा भी दौड़ में साथ-साथ चल रहे थे. केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नीतीन गडकरी से उनके काफी गहरे संबंधों की चर्चा होती रही. नागपुर क्षेत्र में रहने के कारण आरएसएस लॉबी के भी कराबी होने की बात कही जाती रही. दो अधिकारियों की इस राजनीतिक लॉबी का नतीजा यह हुआ कि दोनों में से कोई भी अधिकारी इस मुकाम को हासिल नहीं कर पाया.
चर्चा के अनुसार कोल इंडिया के कुछ अधिकारियों ने ही परदे के पीछे से श्री सिंह के खिलाफ पीएमओ ऑफिस तक लिखित शिकायत दर्ज करायी. नतीजतन चेयरमैन के पद पर वर्त्तमान सरकार के सबसे चहेते अधिकारी गोपाल सिंह के स्थान पर अचानक मंत्रालय ने श्री झा के नाम पर मुहर लगा दी.
