कोलकाता: चीन और अमेरिका के बाद भारत का इकोलॉजिकल फुटप्रिंट दुनिया में तीसरा सबसे ज्यादा है. मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी. इकोलॉजिकल फुटप्रिंट मानवीय आबादी की प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी जरूरतों का मापक है.
इकोलॉजिकल फुटप्रिंट के हिसाब से 19 प्रतिशत के साथ चीन पहले, 13.7 प्रतिशत के साथ अमेरिका दूसरे और 7.1 प्रतिशत के साथ भारत तीसरे स्थान पर है. लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2014 के अनुसार ब्राजील और रूस शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं और यह पांचों देश वैश्विक मांग का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं.
विश्व पर्यावरण कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि हम हर साल जो पारिस्थितिकी संबंधित सामानों व सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उसे उपलब्ध कराने के लिए मानवीय आबादी को इस समय डेढ़ पृथ्वियों की पुनरुत्पादक क्षमता की जरूरत है. चीन प्रति व्यक्ति फुटप्रिंट के लिहाज से 76 वें स्थान पर है, लेकिन उसकी आबादी सबसे ज्यादा है, इसलिए राष्ट्रीय फुटप्रिंट के लिहाज से वह पहले स्थान पर है. इसी तरह भारत प्रति व्यक्ति फुटप्रिंट के लिहाज से 136 वें स्थान पर है, लेकिन देशों के कुल फुटप्रिंट के लिहाज से तीसरे स्थान पर है.
एक कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-भारत के महासचिव व सीइओ रवि सिंह ने रिपोर्ट को लेकर बताया कि रिपोर्ट से हमारे हर दिन के विकल्पों के महत्व और पृथ्वी पर उनके प्रभाव का पता चलता है. भविष्य में सभी विकास स्थायी हों, यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने जरूरी हैं. रिपोर्ट के अनुसार पिछले 40 वर्षो में मछली, पक्षियों, स्तनधारी जीवों, उभयचरों और सरीसृपों की आबादी में 52 प्रतिशत की कमी आयी है. रिपोर्ट में भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में जल की बढ़ती कमी की वजह से स्थानीय आबादियों की गंभीर स्थिति और घटते भूजल संसाधनों और जलवाही स्तरों में गिरावट की खतरनाक स्थिति के बारे में भी बताया गया.
