UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर देना होगा चार्ज? गाजियाबाद के व्यापारी चिंतित, बोले- फिर कैश की ओर जाना पड़ेगा

गाजियाबाद के छोटे व्यापारी ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR (Merchant Discount Rate) लगाए जाने की चर्चाओं से चिंतित हैं. किराना, फल-सब्जी और डेयरी कारोबारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में यह अतिरिक्त शुल्क उठाना मुश्किल होगा.

UPI Payment Charges : डिजिटल पेमेंट को लेकर गाजियाबाद के छोटे व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ गई है. 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) लगाए जाने की चर्चाओं के बाद किराना, फल-सब्जी और डेयरी कारोबारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क का बोझ उठाना मुश्किल होगा. व्यापारियों को आशंका है कि यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो बड़े भुगतान के लिए कुछ दुकानदार दोबारा नकद लेनदेन का विकल्प अपना सकते हैं.

2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर नहीं लगेंगे शुल्क

बताया जा रहा है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लिया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर 3,000 रुपये के भुगतान पर 12 रुपये और 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये का शुल्क बनेगा. यह शुल्क ग्राहक के बजाय व्यापारी से लिए जाने की बात कही जा रही है. वहीं, 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर शुल्क नहीं होने की बात कही गई है. इस व्यवस्था को लेकर गाजियाबाद के छोटे कारोबारी अपने कारोबार की लागत और मुनाफे पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं.

किराना कारोबारियों ने बताया मुनाफे पर असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार किराना कारोबारी राजीव सोनी ने कहा की रिटेल कारोबार में कई सामानों पर केवल 2 से 5 प्रतिशत तक का मार्जिन बचता है. वहीं, ब्रांडेड सामान में यह मार्जिन कई बार 10 प्रतिशत से भी कम रहता है. उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये की बिक्री पर करीब 50 से 55 रुपये तक की बचत होती है. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर MDR कटने से सीधे मुनाफे पर असर पड़ेगा. उनका कहना है कि दुकान का किराया, कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे खर्च पहले से ही कारोबार पर हैं.

सब्जी कारोबारियों को भी अतिरिक्त बोझ की चिंता

आलू-प्याज कारोबारी श्रीपाल यादव ने कहा कि कई छोटे कारोबारियों की कमाई काफी सीमित होती है. ऐसे में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है. उन्होंने कहा कि यदि शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जा सकता है तो इसका भार व्यापारी को ही उठाना पड़ेगा. ऐसी स्थिति में व्यापारी बड़े डिजिटल भुगतान की जगह नकद लेने पर विचार कर सकते हैं.

डेयरी कारोबार में करीब 1 प्रतिशत मार्जिन

डेयरी कारोबारी अचल ने बताया कि दूध के कारोबार में करीब 1 प्रतिशत का मार्जिन रहता है. उनके मुताबिक रोजाना 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान करने वाले करीब 8 से 10 ग्राहक आते हैं. उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगता है तो ऑनलाइन पेमेंट लेने के बजाय कैश लेने या ग्राहकों को दूसरा विकल्प देने पर विचार करना पड़ सकता है. उनका कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में डिजिटल भुगतान का अतिरिक्त शुल्क परेशानी बढ़ा सकता है.

35 साल से फल कारोबार कर रहे व्यापारी ने भी जताई चिंता

करीब 35 साल से फल का कारोबार कर रहे सत्यनारायण गुप्ता ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए डिजिटल भुगतान पर किसी तरह का शुल्क नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक व्यापारियों ने डिजिटल पेमेंट इसलिए अपनाया था क्योंकि इसमें अतिरिक्त लेनदेन शुल्क नहीं देना पड़ता था. व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ छोटे कारोबारियों के हितों और उनके कम मार्जिन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

व्यापारियों की मांग- छोटे कारोबारियों को मिले राहत

गाजियाबाद के कारोबारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों के लिए कारोबार में पहले ही कई तरह के खर्च हैं. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है. व्यापारियों ने मांग की है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ छोटे कारोबारियों को MDR के मामले में राहत दी जाए, ताकि वे बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते रहें.

Also Read : जिसके साथ सात जन्मों का वादा किया, उसी ने ले ली जान, हरदोई में पति ने पत्नी की हत्या की, जाने पूरी खबर

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रवि रंजन कुमार

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >