UP पुलिस का वर्दी पहना सिपाही कर रहा SDM के ड्राइवर के पैर की मालिश, वायरल वीडियो से कानपुर में बढ़ी हलचल

कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक वर्दीधारी पुलिस कांस्टेबल को SDM के ड्राइवर के पैर दबाते हुए देखा गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानिए इस घटना के पीछे की पूरी कहानी.

UP News : वर्दी पुलिस की पहचान और जिम्मेदारी का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन कानपुर से सामने आए एक कथित मामले ने सरकारी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक वर्दीधारी पुलिस कांस्टेबल एक शख्स के पैर दबाता नजर आ रहा है. दावा किया जा रहा है कि जिस व्यक्ति के पैर की मालिश की जा रही है, वह SDM का ड्राइवर है. मामला सामने आने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल से इस तरह की 'सेवा' क्यों कराई जा रही थी?

वर्दी में कांस्टेबल, सामने बैठा शख्स... फिर होने लगी पैर की मालिश

वायरल वीडियो में उत्तर प्रदेश पुलिस का एक कांस्टेबल वर्दी में जमीन पर बैठकर एक व्यक्ति के पैर की मालिश करता नजर आ रहा है. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे के मुताबिक, पैर की मालिश कराने वाला व्यक्ति एसडीएम का ड्राइवर मनोज कुमार है, जबकि मालिश करने वाले कांस्टेबल की पहचान रजत के रूप में बताई जा रही है.

एसडीएम आवास का बताया जा रहा वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि यह वीडियो सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के आवास का है. हालांकि, वीडियो की जगह और उसमें नजर आ रहे लोगों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.

किसी ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया. इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया. देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया और लोग इस पर सवाल उठाने लगे.

'ड्राइवर की इतनी धाक तो साहब का क्या होगा?' उठे सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर एक सरकारी अधिकारी के ड्राइवर के सामने वर्दीधारी पुलिसकर्मी इस तरह नजर आ रहा है, तो प्रशासनिक तंत्र में पद और प्रभाव के इस्तेमाल की स्थिति क्या हो सकती है? हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब, कहां और किन परिस्थितियों में बनाया गया था.

आधिकारिक जांच या कार्रवाई पर नजर

मामले को लेकर अब प्रशासन और पुलिस की ओर से किसी आधिकारिक बयान या जांच की जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है. आधिकारिक पुष्टि के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है.

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By रवि रंजन कुमार

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