UP Crime: झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में 21 वर्षीय एलएलबी छात्र परवेज अली की मौत के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में प्रेमनगर थाने में तैनात सिपाही आशीष सिंह समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, परवेज को ड्रग्स के सैंपल के बहाने बुलाया गया था. इसके बाद उसे कार में बैठाकर कथित तौर पर रुपये वसूलने के लिए डराया-धमकाया गया. इसी दौरान मारपीट हुई, जिसमें उसकी मौत हो गयी.
13 सितंबर को गंभीर हालत में मिला था परवेज
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर को परवेज गंभीर हालत में नगरा हाट मैदान में मिला था. उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. शुरुआत में मामला हादसे से जुड़ा माना जा रहा था. पोस्टमार्टम में शरीर पर चोटों के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की. मृतक के पिता की शिकायत पर 16 सितंबर को अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.
ड्रग्स के सैंपल के बहाने बुलाने का आरोप
एसएसपी विकास कुमार के अनुसार, जांच में सामने आया कि परवेज ड्रग्स की सप्लाई से जुड़ा था. पुलिस का कहना है कि साहिल नाम के व्यक्ति ने उसे ड्रग्स का सैंपल लेकर बुलाया था. परवेज सुकुवा-ढुकुवा कॉलोनी पहुंचा, जहां से उसे कार में बैठाया गया. उसके साथ दो अन्य वाहन भी चल रहे थे. पुलिस के अनुसार, कार में परवेज का वीडियो बनाने और उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर रुपये वसूलने की योजना थी. इसी बात को लेकर विवाद हुआ और कार के अंदर मारपीट शुरू हो गयी. मारपीट के दौरान परवेज गंभीर रूप से घायल हो गया. बाद में कार से उतरते समय वह गिर गया और उसके सिर में भी चोट लगी.
सिपाही समेत आठ गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में प्रयांश, जय श्रीवास्तव, साहिल मिश्रा, भूपेंद्र वंशकार, यश शिवहरे, अर्शिल खान, शनि नामदेव और सिपाही आशीष सिंह को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन कार और सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं. सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है.
चार अन्य आरोपियों की तलाश
पुलिस के अनुसार, मामले में चार अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनकी तलाश जारी है. पुलिस ने मोबाइल सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. शरीर पर मिले चोट और दांत से काटने के निशानों को लेकर भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में सिपाही की भूमिका सामने आने के बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है. अब जांच कथित वसूली के नेटवर्क और फरार आरोपियों तक पहुंचने पर केंद्रित है.
