ओम प्रकाश राजभर बोले- जनता आपस में लड़ती है, नेता सब एक होते हैं मिलते है तो साथ बैठकर रसगुल्ला खाते हैं

समाजवादी पार्टी और NDA नेताओं के बीच बयानबाजी के बीच ओम प्रकाश राजभर ने रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नेता मिलते हैं तो साथ बैठकर रसगुल्ला खाते हैं, जबकि जनता आपस में लड़ती है. राजभर ने राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत संबंधों को अलग-अलग बताया.

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और NDA के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार सुर्खियों में है. इसी बीच एक बातचीत के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर से सपा सांसद राजीव राय की नाराजगी और दोनों नेताओं के बीच रिश्तों को लेकर सवाल किया गया. इस पर मंत्री ने कहा कि नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्तिगत बातचीत पूरी तरह खत्म हो जाए.

नेता मिलते हैं तो एक जगह बैठकर रसगुल्ला खाते हैं

सांसद राजीव राय और मंत्री के बीच हुई कथित नोकझोंक को लेकर जब सवाल पूछा गया तो मंत्री ने हल्के अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, "यार, नेता जब मिलते हैं तो एक जगह बैठकर रसगुल्ला खाते हैं. मंत्री के इस बयान से साफ है कि वह राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत संबंधों को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नेताओं के बीच मतभेद होने के बावजूद बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं होते.

बड़े नेता एक हैं, जनता के बीच छोटे नेता लड़ते हैं

बातचीत के दौरान नेताओं के आपसी संबंधों को लेकर भी सवाल उठा. इस पर कहा गया कि बड़े नेता एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, जबकि छोटे स्तर के नेता जनता के बीच एक-दूसरे से लड़ते नजर आते हैं. मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन के भीतर सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति एक शिष्टाचार का पालन करना जरूरी है. राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के तहत सदन में निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ मर्यादा बनाए रखना जरूरी है.

करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन पर एक मंच पर दिखे नेता

मंत्री ने करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के ठहराव से जुड़े कार्यक्रम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में सपा नेता सनातन पांडेय, वह खुद और सांसद नीरज शेखर मौजूद थे. उन्होंने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद जनहित से जुड़े कार्यक्रमों में नेता एक साथ दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नेताओं के बीच रिश्तों का आकलन करना उचित नहीं होगा.

महिलाओं के विरोध पर मंत्री ने दी सफाई

मंत्री के खिलाफ महिलाओं के विरोध से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. उनके मुताबिक, महिलाओं का विरोध मंत्री से नहीं बल्कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर था. मंत्री ने दावा किया कि महिलाओं ने खुद बयान देकर कहा था कि उन्हें मंत्री से कोई विरोध नहीं है और वे पुलिस के रवैये से नाराज हैं. उन्होंने कहा कि इसी बात को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है.

आजम खान की यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को लेकर सपा पर निशाना

आजम खान से जुड़ी यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के सवाल पर राजभर ने समाजवादी पार्टी पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस मामले के लिए NDA गठबंधन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. मंत्री के मुताबिक, यूनिवर्सिटी को लेकर जमीन और भवन से संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं उस समय पूरी की जानी चाहिए थीं, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे.

नक्शा पास क्यों नहीं कराया गया?

मंत्री ने सवाल उठाया कि जब यूनिवर्सिटी का भवन तैयार हो रहा था, तब उसका नक्शा पास क्यों नहीं कराया गया. उन्होंने कहा कि यदि उस समय जमीन को विद्यालय या संबंधित संस्था के नाम से कानूनी रूप से दर्ज करा दिया गया होता तो आज इस तरह के सवाल नहीं उठते. उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी की शुरुआत समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुई थी और मौजूदा NDA सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

राजनीतिक विरोध के बीच रिश्तों पर उठे सवाल

राजीव राय और मंत्री के बीच कथित मतभेदों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. हालांकि मंत्री के बयान से यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक स्तर पर विरोध के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर संवाद की गुंजाइश बनी हुई है. मंत्री ने कहा कि जनता के बीच नेताओं की बयानबाजी को लेकर भ्रम हो सकता है, लेकिन समय के साथ कई चीजें स्पष्ट हो जाती हैं. उन्होंने राजनीतिक विरोध को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए व्यक्तिगत संबंधों को उससे अलग रखने की बात कही.

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By रवि रंजन कुमार

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