UP News: यूपी में नया शहर बसाने की प्रक्रिया तेज हो गयी है. दादरी नोएडा गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र (DNGIR) के तहत 209.11 वर्ग किलोमीटर में विकसित होने वाले 'नया नोएडा' के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू कर दी गई. इस काम के लिए पांच नवनियुक्त लेखपालों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने संबंधित गांवों में सर्वे शुरू कर दिया है. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आगरा, बरेली और प्रयागराज में भी नए शहर विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है. सरकार का लक्ष्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप आधुनिक शहर तैयार करना है.
नोएडा के 37 गांवों में शुरू हुआ सर्वे
लेखपालों की टीम किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गांव-गांव जाकर सर्वे कर रही है. इस दौरान राजस्व अभिलेखों का सत्यापन, जमीन की वर्तमान स्थिति, मालिकाना हक, खसरा-खतौनी और आबादी क्षेत्र से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है. पहले चरण में कुल 37 गांवों को शामिल किया गया है. इनमें 24 गांव बुलंदशहर और 13 गांव गौतमबुद्ध नगर जिले के हैं. सर्वे पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
औद्योगिक, आवासीय और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित होगा 'नया नोएडा'
सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद किसानों और भूमिधरों के साथ जमीन खरीद की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी. 'नया नोएडा' को औद्योगिक, आवासीय और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है. परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि की जरूरत होगी, इसलिए प्राधिकरण पहले चरण में सभी राजस्व अभिलेखों को अपडेट कर रहा है. किसानों को 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा दिया जाएगा. इसके अलावा 3800 रुपये प्रति वर्गमीटर की अतिरिक्त राशि और सात प्रतिशत विकसित भूखंड का लाभ भी मिलेगा. पूरी प्रक्रिया आपसी सहमति के आधार पर होगी, जिसके लिए दो अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं.
आगरा, बरेली और प्रयागराज में भी बसेंगे नए शहर
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहर विकसित करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. सरकार का उद्देश्य तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवास, आधुनिक बुनियादी सुविधाएं और योजनाबद्ध विकास उपलब्ध कराना है. इस योजना के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. इसके तहत भूमि अर्जन पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक हिस्सा राज्य सरकार अधिकतम 20 वर्षों के लिए सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराएगी, जिससे नई टाउनशिप विकसित करने में तेजी आएगी.
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