UP Advocate Welfare Fund: उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कई अहम घोषणाएं कीं. प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में सीएम योगी ने हाईकोर्ट और जनपद न्यायालयों के अधिवक्ताओं को 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने का ऐलान किया. इसके साथ ही अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की.
युवा वकीलों से न्याय व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील
मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि उनकी भूमिका केवल अदालत में मुकदमों की पैरवी तक सीमित नहीं होनी चाहिए. न्यायपालिका को मजबूत करने और आम लोगों का अदालतों के प्रति विश्वास बनाए रखने में अधिवक्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने बार और बेंच को न्याय व्यवस्था के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों के बीच सम्मान, संवाद, शिष्टाचार और सहयोग बना रहना जरूरी है. योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज और अधिवक्ता समाज के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रयागराज से जुड़े कई अधिवक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों के पक्ष में खड़े रहे.
400 विधि अधिकारियों को मिलेगा टैबलेट, ऑनलाइन हुई अभियोजन व्यवस्था
सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराएगी. इसका उद्देश्य उन्हें तकनीक से जोड़ना और अदालतों में शासन से जुड़े मुकदमों की जानकारी उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि शासन और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय के लिए तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है. जेलों और अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि सुनवाई में लगने वाले समय को कम किया जा सके. न्यायालयों में समय पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के साथ न्यायिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सुरक्षित रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है.
900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी, 10 हजार से ज्यादा चैंबर पर काम
योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक ढांचे के विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है. करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक चैंबर, पुस्तकालय और सामुदायिक कक्ष तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि पहले अधीनस्थ न्यायालयों की स्थिति कमजोर थी और कई अदालतें किराए के भवनों में संचालित होती थीं. अधिवक्ताओं के बैठने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. अब न्यायिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है. एकीकृत न्यायालय परिसर विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, जहां न्यायिक कार्यों के साथ आवासीय सुविधा, अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इनडोर स्टेडियम और कैंटीन जैसी व्यवस्थाएं होंगी.
अधिवक्ता कल्याण से लेकर पुलिस व्यवस्था तक का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता कल्याण योजनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि में वृद्धि की गई है और 70 वर्ष की आयु तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है. कौशाम्बी, श्रावस्ती और कासगंज समेत विभिन्न जिलों में अधिवक्ताओं से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराने की जानकारी भी उन्होंने दी. योगी ने 2017 से पहले पुलिस में खाली पदों और सीमित प्रशिक्षण क्षमता का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, उस समय पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता करीब 3 हजार प्रशिक्षुओं की थी, जिसे बढ़ाकर 7 हजार किया गया. उन्होंने कहा कि जिस तरह पुलिस और न्यायपालिका के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं, उसी तरह लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय व अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
डॉ. राजेंद्र प्रसाद को किया याद, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का भी जिक्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के संगम और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुंभ और माघ मेले के दौरान प्रयागराज आते थे और कल्पवास करते थे. योगी ने उनके इस आचरण को राष्ट्रसेवा और सार्वजनिक जीवन के आदर्शों से जोड़कर देखा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया है और इसका काम शुरू हो चुका है. प्रयागराज में यह विश्वविद्यालय पहले से निर्माणाधीन है और इसका नाम डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर रखा गया है.
