यूपी बिजली विभाग: उत्तर प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के प्रशासनिक दावों और वास्तविक धरातल के बीच बड़ा अंतर साफ झलक रहा है. राज्य सरकार लगातार बिजली ढांचे को सुदृढ़ बनाने की घोषणाएं कर रही है. हालांकि पावर कॉरपोरेशन के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर '1912' पर दर्ज होने वाले मामले असल तस्वीर पेश कर रहे हैं. इस टोल-फ्री सेवा पर लगातार पहुंच रही उपभोक्ता समस्याएं यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि विभागीय व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं.
अघोषित कटौती और खराब आपूर्ति मुख्य वजह
सूचना के अधिकार (RTI) से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार पिछले सात महीनों की अवधि में दर्ज शिकायतों की संख्या चार गुना हो गई है. आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण बताता है कि कुल दर्ज मामलों में से 70 प्रतिशत से अधिक समस्याएं सीधे तौर पर अघोषित बिजली कटौती से जुड़ी हैं. खराब विद्युत आपूर्ति की इन निरंतर शिकायतों ने विभागीय दावों की पोल खोल दी है. सामने आए यह सटीक आंकड़े जमीनी स्तर की बिगड़ी व्यवस्था को बयां करते हैं.
लखनऊ से रिपोर्ट: कॉरपोरेशन की तैयारियों पर सवाल
लखनऊ संवाददाता की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति पावर कॉरपोरेशन के सुचारू संचालन पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है. दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के मध्य कॉल सेंटर पर आने वाली कुल शिकायतों में साढ़े तीन गुना से ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है. भीषण गर्मी और स्थानीय तकनीकी खराबियों के कारण ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिक बेहद परेशान हैं. इस स्थिति ने आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे व्यवसायों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है.
उपभोक्ताओं में बढ़ता असंतोष और समाधान में देरी
बिजली तंत्र में सुधार न होने के कारण उपभोक्ताओं का असंतोष चरम पर पहुंच गया है. अधिकांश लोगों का आरोप है कि टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समय पर समाधान नहीं मिलता. शिकायतों का यह भारी अंबार विद्युत कॉरपोरेशन की तैयारियों की कमी को उजागर करता है. विभाग द्वारा त्वरित कदम न उठाए जाने से आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था चरमरा जाएगी.
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