UP Politics संसद भवन परिसर में उस समय एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव एक दानपेटी लेकर पहुंचीं. उन्होंने वहां मौजूद नेताओं और मीडियाकर्मियों से हंसते हुए पहले पैसे डालने की बात कही. इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी दानपेटी में भारतीय मुद्रा का नोट डाला और विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की. सपा सांसदों ने इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया.
अखिलेश यादव का कड़ा रुख और नारेबाजी
दानपेटी में नोट डालने के तुरंत बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने तीखे तेवर दिखाए. परिसर में 'चढ़ावा चोरों, गद्दी छोड़ो' के गगनभेदी नारे लगाए गए. समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में धार्मिक एवं सार्वजनिक चढ़ावे और दान के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हो रहा है. उनका कहना था कि जनता की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है.
प्रतीकात्मक विरोध से दिया तीखा संदेश
डिंपल यादव का दानपेटी लेकर संसद पहुंचना एक पूर्व नियोजित और प्रतीकात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. उन्होंने हाथ में दानपेटी थामकर यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार धार्मिक और सामाजिक आस्था के चढ़ावे का सही हिसाब देने में विफल रही है. उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सब कुछ दान और चढ़ावे पर ही चलना है, तो संसद में भी इसके लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए.
राजनीतिक तापमान में आया उछाल
इस अनोखे प्रदर्शन को देखकर संसद परिसर में मौजूद अन्य दलों के प्रतिनिधि और मीडियाकर्मी भी हैरान रह गए. विपक्षी दलों के कई अन्य नेताओं ने भी इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की. समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए इस कदम ने संसद के सत्र में राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में और भी तीखे हंगामे के आसार नजर आ रहे हैं.
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