UP News: रसड़ा के दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की तेरही बुधवार को उनके पैतृक गांव खनवर में श्रद्धा, संवेदना और जनसैलाब के बीच हुई. आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा करीब दो लाख लोगों के सामूहिक भोज को लेकर रही. परिवार और आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गयी थी. खनवर में सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. इतने बड़े भोज का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए बलिया में आम तौर पर परोसी जाने वाली बड़ी साइज की एक पूड़ी मान ली जाए, तो करीब दो लाख पूड़ियों की जरूरत पड़ेगी. एक बड़ी पूड़ी में करीब 40-45 ग्राम आटा लगने का अनुमान लें तो करीब 8,000 से 9,000 किलो आटा, यानी लगभग 8 से 9 टन आटे की जरूरत बैठती है. हालांकि यह गणना पूड़ी के अनुमानित आकार पर आधारित है और आयोजन में वास्तव में कितना आटा इस्तेमाल हुआ, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है.
दो लाख लोगों का भोजन, खनवर में दिखा जनसैलाब
उमाशंकर सिंह की तेरही में सुबह से ही खनवर और आसपास का इलाका लोगों से भर गया. आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार करीब दो लाख लोगों ने भोजन ग्रहण किया. इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था अपने आप में इस आयोजन के विशाल स्तर को दिखाती है. लोगों के बैठने और भोजन कराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर इंतजाम किये गये थे. यह भी खास रहा कि तेरही में सिर्फ राजनीतिक कार्यकर्ता या किसी एक दल के लोग ही नहीं पहुंचे. अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कारोबारियों और बड़ी संख्या में आम लोगों ने भी खनवर पहुंचकर उमाशंकर सिंह को श्रद्धांजलि दी.
एक पूड़ी का हिसाब लगाएं तो 8-9 टन आटा!
दो लाख लोगों के भोजन की खबर के बाद सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर है कि आखिर इतने बड़े भोज के लिए कितनी खाद्य सामग्री लगी होगी.
यदि दो लाख लोगों के लिए एक-एक बड़ी पूड़ी का अनुमान लगाया जाए और एक पूड़ी में करीब 40-45 ग्राम आटा माना जाए, तो गणित इस तरह बैठता है—
2,00,000 × 40 ग्राम = 8,000 किलो
और
2,00,000 × 45 ग्राम = 9,000 किलो
यानी केवल एक-एक बड़ी पूड़ी के हिसाब से करीब 8 से 9 हजार किलो आटा यानी 8 से 9 टन आटा लग सकता है.
हालांकि इसे आयोजन में इस्तेमाल हुए वास्तविक आटे की मात्रा नहीं कहा जा सकता. पूड़ी के वास्तविक वजन, आकार, अतिरिक्त तैयारी और बची हुई सामग्री के आधार पर यह मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है.
सिर्फ पूड़ी नहीं, इतने बड़े भोज में और भी बड़ा इंतजाम
दो लाख लोगों के भोजन का मतलब सिर्फ आटे की व्यवस्था करना नहीं था. इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए सब्जी, तेल, मसाले, नमक, ईंधन, पानी, मिठाई और भोजन परोसने से लेकर बैठाने तक की पूरी व्यवस्था करनी पड़ी होगी.
हालांकि उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों में कुल आटा, तेल, सब्जी या अन्य खाद्य सामग्री की आधिकारिक मात्रा और कुल खर्च का विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आया है. इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे किसी अनुमान को वास्तविक आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा. परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर साझा सामग्री में तेरही की तैयारियों और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की जानकारी सामने आयी है. कुछ पोस्ट में भोजन और मिठाइयों की तैयारियों की तस्वीरें/वीडियो भी साझा किये गये हैं, लेकिन इनमें खाद्य सामग्री की प्रमाणित मात्रा दर्ज नहीं है.
भोजपुरी के दिग्गज भी पहुंचे
उमाशंकर सिंह की तेरही में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों के साथ भोजपुरी जगत के चेहरे भी पहुंचे. पवन सिंह और रवि किशन ने भी खनवर पहुंचकर दिवंगत विधायक को श्रद्धांजलि दी. इससे पहले उनके निधन के बाद भी खनवर में लगातार राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी क्षेत्र से जुड़े लोगों का पहुंचना जारी रहा था.
अंतिम यात्रा में भी उमड़ा था जनसैलाब
उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान भी भारी भीड़ देखने को मिली थी. खनवर से बयासी घाट तक करीब 40 किलोमीटर की यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए थे और यात्रा को पूरा होने में लगभग छह घंटे लगे थे. तेरही में एक बार फिर लोगों की बड़ी मौजूदगी ने उनके जनसंपर्क और क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता की तस्वीर सामने रखी.
2022 में बसपा के इकलौते विधायक बने थे उमाशंकर
उमाशंकर सिंह रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के खराब प्रदर्शन के बावजूद वह चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और प्रदेश में पार्टी के इकलौते विधायक बने. उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उनका निर्वाचन क्षेत्र रसड़ा और दल बहुजन समाज पार्टी दर्ज है. उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक जताया था. तेरही में भी अलग-अलग राजनीतिक धाराओं से जुड़े लोगों की मौजूदगी देखने को मिली.
आंकड़ा बड़ा है, लेकिन अंतिम पुष्टि का इंतजार
दो लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था निश्चित रूप से बड़े स्तर का आयोजन थी. लेकिन 8-9 हजार किलो आटे का आंकड़ा वास्तविक खपत नहीं, बल्कि एक बड़ी पूड़ी के अनुमानित वजन के आधार पर निकाला गया गणित है. वास्तविक आटे की मात्रा जानने के लिए आयोजन समिति या परिवार की ओर से खरीद अथवा खपत का आंकड़ा सामने आना जरूरी होगा. इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित तथ्य यही है कि करीब दो लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था की गयी थी, जबकि एक-एक बड़ी पूड़ी के अनुमान पर करीब 8 से 9 टन आटे की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है.
खनवर में उमड़ी भीड़ और इतने बड़े स्तर पर हुए सामूहिक भोज ने एक बार फिर यह दिखाया कि उमाशंकर सिंह की राजनीतिक पहचान के साथ उनका व्यक्तिगत जनसंपर्क भी कितना व्यापक था.
