Prayagraj News: प्रयागराज जिले की 100 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लिए स्थानीय तालाब आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन गए हैं. अब तक अपने स्वयं के संसाधनों के अभाव से जूझ रही इन पंचायतों को जलाशयों के पट्टे जारी करने से 5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व हासिल हुआ है. यह राशि सीधे ग्राम निधि खातों में भेज दी गई है. इस पूंजी के आ जाने से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को गति देने और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है.
दशकों से फंसी राशि का राजस्व प्रशासन से हुआ निस्तारण
वर्ष 2016 से 2026 के बीच मत्स्य पालन हेतु की गई बोलियों से प्राप्त यह राशि काफी समय से तहसील स्तर पर अटकी पड़ी थी. अब सरकारी पहल के अंतर्गत वित्तीय अधिकार हस्तांतरित होते ही पंचायतों को 70-80 हजार रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक की धनराशि प्राप्त हो चुकी है. गंगापार तथा यमुनापार के इलाकों में मनरेगा के माध्यम से खुदवाए गए हजारों ताल-तलैयों में से लगभग 2800 तालाबों को पट्टे पर देकर गांवों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाया गया है.
स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्व-रोजगार के नए अवसरों का सृजन
ग्राम स्तर पर आय के स्थायी स्रोत तैयार होने से न केवल पंचायतों की प्रशासनिक निर्भरता खत्म हुई है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए साधन भी विकसित हो रहे हैं. नीलामी के बाद पट्टे पर तालाब प्राप्त करने वाले स्थानीय निवासी अब आधुनिक तकनीकों की मदद से बड़े पैमाने पर मछली पालन का व्यवसाय कर रहे हैं. इससे गांवों से होने वाले पलायन में कमी आएगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी, जिससे अन्य पंचायतों को भी ऐसी ही प्रेरणा मिलेगी.
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