चपरासी के 368 पदों के लिए 23 लाख आवेदन, अभ्यर्थियों में 255 डाक्टरेट

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय में चपरासियों के 368 पदों पर नियुक्ति के लिए लगभग 23 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं. हर पद के लिए 6 हजार से अधिक आवेदन मिले हैं. इन अभ्यर्थियों में 255 डाक्टरेट है. सचिवालय में चपरासी पद पर नियुक्ति की न्यूनतम योग्यता पांचवी पास होना है. मगर आवेदकों में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय में चपरासियों के 368 पदों पर नियुक्ति के लिए लगभग 23 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं. हर पद के लिए 6 हजार से अधिक आवेदन मिले हैं. इन अभ्यर्थियों में 255 डाक्टरेट है.

सचिवालय में चपरासी पद पर नियुक्ति की न्यूनतम योग्यता पांचवी पास होना है. मगर आवेदकों में 255 पीएचडी उपाधिधारकों के अलावा, डेढ लाख से उपर स्नातक और लगभग 25 हजार एमए, एमएसी हैं.प्रदेश सरकार की तरफ से हाल ही में सचिवालय में 5200-20200 रुपये के वेतनमान में चपरासियों के 368 पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे गये थे। आयु सीमा 18 से 40 वर्ष और आवेदन करने की अन्तिम तिथि 14 सितम्बर तय थी.
सचिवालय प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा जब हमने आवेदनों को वर्गीकृत करना शुरू किया तो हमारी आंखे खुली की खुली रह गयी. 255 आवेदक पीएचडी है, डेढ़ लाख से अधिक स्नातक तथा लगभग 25 हजार एमए, एमएससी डिग्री धारक हैं, इनमें इंजीनियर और एमबीए भी हैं.
अधिकारी ने बताया कि पहले चयन साक्षात्कार के माध्यम से होना था. मगर इतनी बडी संख्या में आये आवेदनों को देखते हुए साक्षात्कार के जरिए चयन में काफी दिन लग जायेंगे.उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों की भारी संख्या को देखते हुए चयन प्रक्रिया में बदलाव पर विचार हो रहा है और अब छटनी के लिए लिखित परीक्षा भी करायी जायेगी.चपरासियों के पदों पर पीएचडी उपाधिधारी अभ्यर्थियों समेत इतनी बडी संख्या में आये आवेदनों से विपक्षी दलों को सरकार पर हमला बोलने का एक और मौका दे दिया है.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा समाजवादी पार्टी सरकार लोगों को रोजगार देने के वादे को पूरा करने में विफल रही है, जबकि तमाम विभागों में बडी संख्या में पद खाली पड़े हैं.कांग्रेस ने एक बयान जारी करके कहा आकड़े सपा सरकार के विकास के दावे की पोल खोलने वाले हैं. रोजगार देने के उसके वादों का क्या हुआ. चपरासी पद पर इतने पढे लिखे युवकों का आवेदन यह बताने के लिए पर्याप्त है कि बेरोजगारी का आलम क्या है.
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