UP Politics: कानपुर में भाजपा के प्रदेश महामंत्री और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभारी शंकर लाल लोधी के स्वागत समारोह में अचानक हंगामा हो गया. केशव नगर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर दो पदाधिकारी आमने-सामने आ गए. शुरुआत में इसे सामान्य कहासुनी माना गया, लेकिन विवाद जल्द ही गंभीर हो गया. नेताओं और कार्यकर्ताओं से भरे कार्यक्रम में दोनों के बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई शुरू हो गई, जिससे अफरातफरी फैल गई.
दो पदाधिकारियों की बहस बनी झड़प
विवाद पूर्व जिला मंत्री शिवपूजन सविता और जिला सह-मीडिया प्रभारी डॉ. विनय सिंह राठौर के बीच हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंच पर सीट को लेकर दोनों में बहस छिड़ी थी. आसपास मौजूद लोगों ने पहले उन्हें शांत कराने की कोशिश की, मगर बात नहीं बनी. कुछ ही पलों में दोनों एक-दूसरे के सामने आ गए और धक्का-मुक्की शुरू हो गई. झड़प के दौरान दोनों के कपड़े फटने की बात भी सामने आई, जिससे समारोह का माहौल असहज हो गया.
बीच-बचाव के बाद भी फिर भिड़े
मामला बढ़ता देख भाजपा दक्षिण जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह और अन्य पदाधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बीच-बचाव कर दोनों नेताओं को अलग किया और कार्यक्रम को सामान्य करने का प्रयास किया. हालांकि, तनाव तुरंत खत्म नहीं हुआ. कुछ देर बाद दोनों पदाधिकारी फिर से भिड़ गए और विवाद दोबारा हाथापाई में बदल गया. फिर पार्टी नेताओं ने दोनों को कार्यालय से बाहर भेज दिया. बाहर भी उनके बीच कहासुनी और टकराव का सिलसिला बना रहा.
कान में चोट और वीडियो से बढ़ी चर्चा
कार्यालय के बाहर हुए विवाद में डॉ. विनय सिंह राठौर के कान में चोट लगने और खून निकलने की जानकारी सामने आई है. घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बहस, धक्का-मुक्की और नेताओं को समझाने की कोशिश करते देखा जा सकता है. सार्वजनिक स्वागत समारोह में हुए इस घटनाक्रम ने संगठन को असहज कर दिया. वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई मारपीट से पार्टी अनुशासन पर सवाल उठे और मामले की गंभीरता बढ़ गई.
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने घटना पर नाराजगी जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने साफ कहा कि पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता. मामले की पड़ताल के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें सुनील तिवारी, शिवराम सिंह, अनिल दीक्षित, उपेंद्र पासवान और अशोक राजपूत शामिल हैं. समिति को तीन दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी. दोषी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों पर कठोर संगठनात्मक कार्रवाई हो सकती है.
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