Indian Railways Promotion Rules : भारतीय रेलवे ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर अब क्वालिफाइंग मार्क्स में 10 प्रतिशत की छूट के साथ ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति लागू की जाएगी. इसका उद्देश्य आरक्षित पदों को खाली रहने से रोकना और प्रमोशन प्रक्रिया में एकरूपता लाना है. हालांकि, सुरक्षा से जुड़े पदों पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी.
सभी जोन और उत्पादन इकाइयों को निर्देश
रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोनल महाप्रबंधकों और उत्पादन इकाइयों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए नियमों के तहत यदि आरक्षित पदों के लिए पर्याप्त SC/ST कर्मचारी निर्धारित योग्यता हासिल नहीं कर पाते हैं, तो असफल उम्मीदवारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को प्रमोशन का अवसर दिया जा सकेगा. इस व्यवस्था से लंबे समय से खाली पड़े आरक्षित पदों को भरने में मदद मिलने की उम्मीद है.
क्यों करना पड़ा नियमों में बदलाव?
रेलवे बोर्ड के सामने प्रमोशन से जुड़े नियमों को लेकर कई जगहों पर भ्रम की स्थिति सामने आई थी. कई मामलों में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने के कारण SC/ST के लिए आरक्षित पद खाली रह जाते थे. इसी को देखते हुए बोर्ड ने पुराने दिशा-निर्देशों और विभिन्न परिपत्रों की समीक्षा के बाद प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था जारी की है. इसका उद्देश्य नियमों में एकरूपता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.
क्वालिफाइंग मार्क्स में 10 प्रतिशत की छूट
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, ग्रुप ‘सी’ के भीतर वरिष्ठता के आधार पर होने वाले चयन में SC/ST कर्मचारियों को प्रोफेशनल एबिलिटी और कुल एग्रीगेट अंकों में 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी. वहीं, ग्रुप ‘सी’ से ग्रुप ‘बी’ के 70 प्रतिशत चयन कोटे में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के लिए लिखित परीक्षा और कुल अंकों में 60 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित है. SC/ST कर्मचारियों के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत होगी. हालांकि, सर्विस रिकॉर्ड में कम से कम 15 अंक हासिल करना जरूरी रहेगा.
क्या है ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति?
नई व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति है. यदि निर्धारित छूट देने के बाद भी आरक्षित पद खाली रह जाते हैं, तो फेल हुए SC/ST कर्मचारियों में से सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को प्रमोशन के लिए चुना जा सकेगा. इसके लिए उम्मीदवार को लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और सर्विस रिकॉर्ड में अलग-अलग तथा कुल मिलाकर कम से कम 20 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा.
छह महीने के लिए मिलेगा एड-हॉक प्रमोशन
‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था के तहत प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों को शुरुआत में छह महीने के लिए एड-हॉक आधार पर पदोन्नति दी जाएगी. इस दौरान कर्मचारी के कामकाज, कार्यकुशलता और आचरण का मूल्यांकन किया जाएगा. छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे. रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर ही प्रमोशन को नियमित किया जाएगा.
सुरक्षा से जुड़े पदों पर कोई छूट नहीं
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सेफ्टी कैटेगरी के पदों पर इन नियमों का लाभ नहीं मिलेगा. इन पदों पर प्रमोशन के लिए निर्धारित योग्यता और मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. रेलवे का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.
LDCE में लागू नहीं होगी यह व्यवस्था
ग्रुप ‘सी’ के तहत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE), जहां पैनल मेरिट के आधार पर तैयार होता है, उसमें ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था लागू नहीं होगी. इसके अलावा, पहले ही पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं को दोबारा नहीं खोला जाएगा.
बिना छूट पास करने वालों को UR सीट पर जगह
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई SC/ST कर्मचारी बिना किसी छूट का लाभ लिए सामान्य योग्यता मानकों के आधार पर परीक्षा पास करता है, तो उसका समायोजन अनारक्षित (UR) सीट पर किया जाएगा. इससे आरक्षित वर्ग के अन्य पात्र कर्मचारियों के लिए आरक्षित कोटे की सीट उपलब्ध रहेगी और आरक्षण का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार दिया जा सकेगा.
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