“जिंदा बेटी का किया श्राद्ध, दूसरी जगह बलि और मुंडन! प्यार की कीमत बना समाज का जुल्म”

Human Rights Violation: पश्चिम बंगाल में प्रेम विवाह करने पर परिवार ने जिंदा बेटी का श्राद्ध कर उसे मरा घोषित कर दिया, जबकि ओडिशा में अंतरजातीय शादी के बाद लड़की के परिवार को बलि और मुंडन जैसे शुद्धिकरण अनुष्ठान से गुजरना पड़ा. दोनों मामलों ने समाज की कठोर सोच उजागर कर दी.

Human Rights Violation: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कल्याणी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी का श्राद्ध कर दिया. यह लड़की कॉलेज की छात्रा थी और उसने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर दूसरे धर्म के युवक से शादी कर ली थी. यह विवाह परिवार की इजाजत के बिना हुआ, जिससे नाराज होकर घरवालों ने उसे ‘मृत’ घोषित करते हुए बाकायदा हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार श्राद्ध की रस्में निभाईं.

परिवार के सदस्यों ने सिर मुंडवाया, उसकी तस्वीर पर माला चढ़ाई गई और उसके सभी व्यक्तिगत सामान जला दिए गए. युवती की मां ने बताया कि “उसने हमारा अपमान किया है, अब वह हमारे लिए मर चुकी है.” युवती के चाचा सोमनाथ बिस्वास ने कहा, “हमने उसकी शादी तय कर दी थी लेकिन उसने विद्रोह कर दिया. अब उसके लिए हमारे दिल में कोई जगह नहीं है.”

दूसरे धर्म में विवाह बना विवाद की जड़

यह विवाह 12 दिन पहले हुआ था और तभी से युवती अपने ससुराल वालों के साथ जिले में ही कहीं और रह रही है. नवविवाहिता का पति एक अलग धर्म से है, जिस पर परिवार ने नाराजगी जाहिर की है. हालांकि, यह साफ नहीं किया गया कि युवक का धर्म परिवार के गुस्से का मुख्य कारण है या नहीं.

युवती के पिता विदेश में कार्यरत हैं और परिवार के इस निर्णय का समर्थन कर चुके हैं. बताया गया है कि युवती की काउंसलिंग मनोवैज्ञानिकों द्वारा की जा रही है.

पुलिस का बयान: कोई कानूनी कार्रवाई संभव नहीं

स्थानीय पुलिस ने भी मामले की पुष्टि की है लेकिन किसी भी प्रकार की कार्रवाई से इनकार किया है क्योंकि युवती बालिग है और उसके द्वारा या उसके पति द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह पारिवारिक मामला है, और जब तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं होती, पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती.”

ओडिशा में जातिगत भेदभाव का घिनौना चेहरा

दूसरी ओर, ओडिशा के रायगढ़ जिले से भी एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. काशीपुर ब्लॉक के बैगनगुडा गांव में एक लड़की ने अपने ही गांव के अनुसूचित जाति के युवक से विवाह किया. इस विवाह को गांव के लोग पचा नहीं पाए और नाराज होकर लड़की के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. इसके बाद परिवार पर दबाव डाला गया कि यदि वे दोबारा ‘जाति’ में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा.

शुद्धिकरण में बलि और मुंडन की शर्त

गांव वालों की शर्त के अनुसार लड़की के परिवार को जानवरों की बलि देनी पड़ी और करीब 40 लोगों को मुंडन संस्कार करवाना पड़ा. इस अमानवीय प्रक्रिया का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति मुंडन करवाता नजर आ रहा है.

प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश

जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, काशीपुर के बीडीओ विजय सोय ने अधिकारियों की एक टीम को गांव भेजकर जांच के निर्देश दिए. प्रशासन का कहना है कि जांच में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह मामला भारतीय समाज में गहरे जातिवाद की कुरीतियों की पोल खोलता है.

समाज में अब भी जड़ें जमाए बैठी हैं कुरीतियां

इन दोनों घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय समाज में आज भी अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाह को सहजता से स्वीकार नहीं किया जाता. युवाओं की निजी स्वतंत्रता और उनके संवैधानिक अधिकारों को सामाजिक बंधनों में बांधने की कोशिशें की जा रही हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल असंवैधानिक हैं, बल्कि मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन भी हैं. प्रेम और विवाह जैसे निजी निर्णयों पर सामाजिक दबाव बनाना या सजा देना देश की लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है.

कब बदलेगा समाज का नजरिया?

जब तक समाज में शिक्षा, सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान नहीं बढ़ेगा, तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी. ज़रूरत है कि प्रशासन, मीडिया और समाज मिलकर इन कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाएं और ऐसी मानसिकता को बदलने का प्रयास करें जो जाति और धर्म के नाम पर युवाओं के फैसलों को दंडित करती है.

नोट-: यह खबर सूचनाओं पर आधारित है इस खबर की पुष्टि प्रभात खबर नहीं करता.

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Published by: Abhishek singh

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