UP News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज शहर में व्याप्त भीषण जलभराव की गंभीर स्थिति पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने का कड़ा निर्देश जारी किया है. न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने जिलाधिकारी तथा नगर निगम आयुक्त को स्पष्ट आदेश दिया कि 24 से 48 घंटे के भीतर शहर के सभी प्रभावित इलाकों से पानी पूरी तरह से बाहर निकाला जाए. अदालत ने दारागंज मोरी गेट से जल निकासी शुरू करने की अनुमति दे दी है.
अधिकारियों से मांगा विस्तृत खाका और जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ने अदालत को अवगत कराया कि समस्या के निवारण के लिए एक ठोस योजना तैयार की गई है, जिसका हलफनामा दाखिल किया जाएगा. इसके अतिरिक्त शासन के शहरी विकास विभाग और स्थानीय निकाय निदेशक से भी जवाब तलब किया गया है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा कि भविष्य में अतिवृष्टि के दौरान जलभराव को रोकने के लिए सरकार के पास क्या दीर्घकालिक योजनाएं हैं. इस दौरान नगर आयुक्त को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया.
सीवर का पानी घुसने से जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त
न्यायालय को सूचित किया गया कि जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर और प्रीतम नगर समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में लगभग 3000 से 4000 मकान जलमग्न हो चुके हैं. केवल बरसात का पानी ही नहीं, बल्कि सीवर का गंदा जल भी लोगों के घरों के भीतर प्रवेश कर गया है. भारी जलभराव के चलते अनेक अधिवक्ताओं और उनके सहायकों के लिए अदालत तक पहुंचना असंभव हो गया, जिससे न्यायिक कार्यों में भी बाधा उत्पन्न हुई. एमजी मार्ग स्थित कैचमेंट योजना वर्तमान में शासन स्तर पर लंबित है.
केशव प्रसाद मौर्य ने प्रशासन को दिए कड़े निर्देश
प्रयागराज में भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति ने आम लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. शहरवासियों को हो रही गंभीर कठिनाइयों पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संज्ञान लेते हुए कहा कि कारण चाहे जो भी हो, जनहित में इसका स्थायी समाधान प्राथमिकता पर हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि समय रहते कदम उठाए गए होते तो यह स्थिति न बनती. केशव प्रसाद मौर्य ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को तत्काल राहत कार्य चलाने तथा भविष्य के लिए ठोस उपाय सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं.
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