देश की पहली अंतरिक्ष प्रयोगशाला MMMUT गोरखपुर के खाते में ऐतिहासिक उपलब्धि

UP News: मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर को देश की पहली 'अंतरिक्ष प्रयोगशाला' की स्थापना के लिए चुना गया है। यह अत्याधुनिक सुविधा छात्रों और शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रशिक्षण और अवसर प्रदान करेगी।

UP News: गोरखपुर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर को देश की पहली 'अंतरिक्ष प्रयोगशाला' की स्थापना के लिए चयनित किया गया है. भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACE) की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में 6.5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. यह प्रयोगशाला "क्लासरूम टू कॉसमॉस" कार्यक्रम के तहत संचालित होगी. इसके माध्यम से यह संस्थान अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होगा, जिससे पूरे क्षेत्र में तकनीकी विकास को नई दिशा मिलेगी.

व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा की गई जानकारी

IN-SPACE देश के सात जोन में अत्याधुनिक स्पेस लैबोरेटरीज का निर्माण कर रहा है। जोन-2 के अंतर्गत गोरखपुर के एमएमएमयूटी को चुना गया है. यह प्रयोगशाला छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और शोध के अवसर प्रदान करेगी. साथ ही, क्षेत्र की गैर-सरकारी संस्थाएं (NGEs) भी इसका उपयोग कर सकेंगी. इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी IN-SPACE ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी। इसमें बताया गया कि भारत की नई पीढ़ी को करके सीखने का माहौल देना आवश्यक है.

प्रयोगशाला में विकसित होने वाली तीन अत्याधुनिक और उन्नत एकीकृत सुविधाएं

प्रोजेक्ट के प्रधान अन्वेषक डॉ. विजय कुमार वर्मा के अनुसार, इस प्रयोगशाला के अंतर्गत तीन प्रमुख सुविधाएं विकसित की जाएंगी—सैटेलाइट सिस्टम्स प्रयोगशाला, स्पेस रोबोटिक्स प्रयोगशाला और स्पेस एनवायरनमेंट टेस्टिंग सुविधा. ये सुविधाएं विद्यार्थियों, शोधार्थियों, स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय संस्थानों को उपग्रह प्रणालियों, अंतरिक्ष रोबोटिक्स तथा अंतरिक्ष हार्डवेयर के डिजाइन, विकास और परीक्षण का एक समग्र व्यावहारिक मंच प्रदान करेंगी. यहां स्मॉल सैटेलाइट्स, क्यूबसैट, रोबोटिक्स और थर्मल वैक्यूम टेस्टिंग जैसे अत्याधुनिक परीक्षण आसानी से किए जा सकेंगे.

कुशल नेतृत्व, विशेषज्ञ टीम और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का नया संकल्प

इस परियोजना का नेतृत्व इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार वर्मा कर रहे हैं, जबकि डॉ. ऑडिथन सिवरामन सह-प्रधान अन्वेषक की भूमिका निभाएंगे. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा और पूर्व कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने इस सफलता पर खुशी जताई है. कुलपति ने कहा कि यह प्रयोगशाला पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुविषयी अनुसंधान, स्टार्टअप विकास, कौशल संवर्धन और अकादमिक-औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देगी. यह ऐतिहासिक कदम गोरखपुर को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाएगा.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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