UP News ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खेल इतिहास का नया स्वर्णिम अध्याय लिखा गया. त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग जूडो प्रतियोगिता में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया. एक साधारण साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता ने भारत को इन प्रतिष्ठित खेलों में जूडो का पहला सोना दिलाया. यह उपलब्धि पूरे देश, उत्तर प्रदेश राज्य तथा उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय बनी है.
रोमांचक मुकाबले में 'गोल्डन स्कोर' से दर्ज की जीत
कांस्य और रजत से आगे बढ़कर स्वर्ण तक का यह सफर संघर्षपूर्ण रहा. कनाडा की मजबूत प्रतिद्वंद्वी हेडी क्वाच के खिलाफ फाइनल मैच में अस्मिता शुरुआत में पिछड़ गईं और उन पर पेनाल्टी भी लगी. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए नियमित चार मिनट में मुकाबला 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया. निर्णायक अंक न मिलने से मैच गोल्डन स्कोर (सडन डेथ) में गया, जहाँ अस्मिता ने आक्रामक खेल से जीत दर्ज की.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी हार्दिक बधाई
गाजियाबाद पुलिस में उप-निरीक्षक (एसआई) के पद पर तैनात अस्मिता डे की इस अभूतपूर्व सफलता पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी शुभकामनाएँ भेजीं. उन्होंने लिखा कि यह स्वर्णिम सफलता देश की बेटियों के अदम्य साहस, अनुशासन, संकल्प और अनवरत परिश्रम का प्रेरक प्रतीक है. सीएम योगी ने उम्मीद जताई कि अस्मिता की यह स्वर्णिम यात्रा बिना रुके इसी तरह लगातार आगे बढ़ती रहेगी और देश का नाम रोशन करेगी.
डीजीपी व जूडो एसोसिएशन ने बताया अनुशासन की मिसाल
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने भी अस्मिता को पुलिस विभाग का गौरव बताया. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एक विश्वस्तरीय एथलीट और समर्पित पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी कार्यकुशलता को दर्शाती है. डीजीपी ने अस्मिता को अनुशासन, दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और उत्कृष्टता की प्रतिमूर्ति करार दिया. इसके साथ ही यूपी जूडो एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर हलवासिया और महासचिव मुनव्वर अंजार ने भी बधाई देते हुए इसे जूडो के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया.
यह भी पढ़े: मुरादाबाद: मोमबत्ती गोदाम में आग, अफरातफरी
