यूपी के बलिया में सिस्टम फेल! खुद इंजीनियर बने नौरंगा के ग्रामीण, चंदा जुटाकर गंगा कटान से बचाने के लिए ठोकर बना रहे लोग

Ballia Ganga Erosion: बलिया के नौरंगा भुआल छपरा गांव में गंगा कटान से दहशत है. प्रशासनिक मदद नहीं मिलने पर ग्रामीण श्रमदान और चंदा जुटाकर ठोकर निर्माण में जुटे हैं.

Ballia Ganga Erosion: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सरकारी सिस्टम पर सवाल उठाती एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. बैरिया तहसील क्षेत्र के नौरंगा भुआल छपरा गांव पर इन दिनों गंगा नदी के तेज कटान का भारी खतरा मंडरा रहा है. जब सरकारी फाइलें और बाढ़ विभाग की नीतियां इस 20 हजार की आबादी वाले गांव को बचाने में नाकाम रहीं, तो हार मानने के बजाय ग्रामीणों ने खुद ही कमान संभाल ली. अब गांव के बच्चे, बुजुर्ग और युवा श्रमदान और आपसी चंदे से गंगा की उफनती लहरों के बीच अपना सुरक्षा कवच खुद तैयार कर रहे हैं.

चंदा, श्रमदान और बांस-बल्ली का सहारा

गंगा नदी का जलस्तर और तेज बहाव लगातार नौरंगा की कृषि भूमि और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है. समय रहते प्रशासन द्वारा कोई कटानरोधी कार्य न किए जाने पर ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया. गांव वालों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया. मां गंगा की पूजा-अर्चना की और अपने निजी खर्च पर नदी में ठोकर (स्पर) बनाने के काम में जुट गए. तस्वीरें बयां कर रही हैं कि कैसे गांव के लोग फावड़े चला रहे हैं, बांस-बल्ली गाड़ रहे हैं और रेत से भरी बोरियां सिर पर ढोकर पानी के तेज बहाव को मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस अस्थाई ठोकर के बनने से नदी की धारा का सीधा दबाव गांव पर कम होगा और उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी.

बाढ़ विभाग ने क्या कहा?

एक तरफ जहां जनता अपना आशियाना बचाने के लिए दिन-रात पसीना बहा रही है, वहीं जिम्मेदार सरकारी महकमे गहरी नींद में हैं. इस महा-श्रमदान के संबंध में बाढ़ विभाग के अधिकारियों से जब ग्रामीणों ने संपर्क किया गया तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी ही नहीं है. दूसरी ओर, नौरंगा के ग्रामीणों ने सरकारी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

कटान के पानी में तैरती ‘वोट बैंक’ की राजनीति

प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में सियासत भी पूरी तरह हावी दिख रही है. यह इलाका पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह का कार्यक्षेत्र रहा है, लेकिन अब यहां के सियासी समीकरण बदल चुके हैं. गांव के स्थानीय निवासी सुधीर ठाकुर बताते हैं कि नौरंगा ग्राम सभा के लोग मुख्य रूप से भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं. विडंबना यह है कि वर्तमान में इस क्षेत्र के सांसद और विधायक दोनों ही समाजवादी पार्टी से हैं. सुधीर ठाकुर का दावा है कि इसी राजनीतिक खुन्नस और वोट बैंक के गणित के चलते मौजूदा जनप्रतिनिधियों ने इस इलाके से दूरी बना रखी है. इतनी विषम परिस्थिति होने के बावजूद अब तक न तो विधायक और न ही सांसद गांव वालों का हाल जानने पहुंचे हैं.

प्रशासन से आखिरी गुहार

नौरंगा गांव के निवासी सुधीर ठाकुर, प्रकाश ठाकुर, राजू ठाकुर, पूर्व प्रधान राज मंगल ठाकुर, नन्हक ठाकुर, राज नारायण यादव, धन बिहारी यादव, रविंद्र ठाकुर, झुना ठाकुर, विनोद ठाकुर और रामावतार ठाकुर सहित कई लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल स्थायी कटानरोधी कार्य शुरू कराने की अपील की है. ग्रामीणों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं और सही समय पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो इस बार पूरी की पूरी नौरंगा ग्राम सभा गंगा में विलीन हो सकती है. फिलहाल, यह गांव अपने ही संसाधनों के भरोसे अपने वजूद की जंग लड़ रहा है. ग्रामीणों की अपील है कि सरकार और सिस्टम इस मामले में ध्यान दें और गांव के लोगों की मदद करें.

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By Sakshi Kumari

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