समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ दर्ज शत्रु संपत्ति से जुड़े छह मुकदमों को एक साथ क्लब करने की अर्जी पर रामपुर की विशेष अदालत 11 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी. ये सभी मामले वर्ष 2019 में अजीमनगर और सिविल लाइंस थानों में दर्ज किए गए थे. आजम खान के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि चूंकि सभी मामले एक ही प्रकृति के हैं, इसलिए पत्रावली को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जानी चाहिए.
एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है मामलों की सुनवाई
वर्तमान में इन सभी मुकदमों की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही है, जहां ज्यादातर मामलों में गवाही की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है. अदालत ने मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखते हुए अगली तिथि निर्धारित की है. यदि अदालत इन मामलों को एक साथ जोडने की अनुमति देती है, तो इससे मुकदमे की प्रक्रिया में तेजी आएगी और विधिक जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
डूंगरपुर प्रकरण में बचाव पक्ष ने सौंपी गवाहों की सूची
दूसरी ओर, वर्ष 2016 के चर्चित डूंगरपुर प्रकरण में अभियोजन पक्ष की गवाही पूरी होने के बाद रामपुर अदालत ने आजम खान को अपने बचाव में सफाई साक्ष्य पेश करने की अनुमति दी है. मंगलवार को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आजम खान के वकील ने अदालत में 11 गवाहों की सूची प्रस्तुत की. अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी, जहां बचाव पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे.
2019 में दर्ज हुए थे जबरन मकान ढहाने के मुकदमे
डूंगरपुर मामला तब का है जब प्रदेश में सपा सरकार थी और आजम खान कैबिनेट मंत्री थे. आरोप है कि गरीबों के लिए आसरा आवास बनाने के नाम पर कुछ लोगों के पुराने मकानों को जबरन तुड़वा दिया गया था. वर्ष 2019 में भाजपा सरकार आने के बाद पीड़ितों की शिकायत पर मुकदमे दर्ज हुए. शुरुआत में नामजद न होने के बावजूद बाद में सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने आजम खान को आरोपी बनाया था.
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